अगर DIG विकास वैभव नही होते तो चली जाती और जाने, इस अफ़सर के निर्णय ने इंसाफ़ दिलाया


ट्रिपल मर्डर केस के तीसरे दिन भागलपुर से प्रकाशित दैनिक भास्कर ने 28 नवंबर 2017 के अंक में पड़ोसियों की भूमिका पर सवाल उठाया था। इसके बाद पुलिस ने पड़ोसियों की भूमिका पर जांच की। सवा माह बाद गैंगरेप पीड़िता ने भी चार पड़ोसियों का नाम बताया, जिन्हें पुलिस ने गिरफ्तार किया था अौर अखिरकार कोर्ट ने भी उन्हीं पड़ोसियों को हत्या और गैं”गरे’प का दो’षी मानकर स’जा सुनाई।

 

 

28 नवंबर 2018 के अंक में भास्कर ने यह सवाल उठाया था कि घटनास्थल के अगल-बगल सोए 16 पड़ोसियों को तीन हत्या अौर गैंगरेप की भनक नहीं लगी। जबकि घटनास्थल घनी आबादी के बीच था। 8/12 का कमरा और पांच फीट के आंगन में बाहर-भीतर पड़ोसियों ने बच्ची के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। विरोध करने पर पति की हत्या कर दी गई थी। महिला और उसके 12 साल के बेटे को भी मौत की नींद सुला दिया गया था।

 

 

जबकि बेटी को अधमरा कर नग्न हालत में छोड़ दिया गया था। कमरे और आंगन से सटे पड़ोसियों के घर, आंगन, दालान (ग्रामीण बरामदा) में तीन ओर 16 लोग सोए हुए थे, लेकिन किसी को रात में घटना की भनक नहीं लगी थी। क्योंकि वारदात में पड़ोसी ही शामिल थे। इस कारण पुलिस को सबूत जुटाने अौर हत्यारों का पता लगाने में देरी हुई थी।

 

 

 

चुनौतीपूर्ण केस था, अभी तक पीड़ित परिवार को दी गई है सुरक्षा: डीआईजी
मैंने खुद घटनास्थल का दौरा किया था अौर केस की जांच, हत्यारों की गिरफ्तारी के िलए एसअाईटी बनाई थी। मुख्यालय स्तर से भी हर दिन इस केस की प्रोग्रेस रिपोर्ट ली जा रही थी। पटना में बच्ची के समुचित इलाज के साथ-साथ उसकी सुरक्षा का इंतजाम था। पीएमसीएच जाकर हालचाल भी लिया था। अभी भी पीड़ित परिवार को सुरक्षा दी गई है। समय-समय पर केस का रिव्यू कर उसमें अावश्यक दिशा-निर्देश भी दिये गए थे। – विकास वैभव, DIG


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