भागलपुर में शारदीय नवरात्रि की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। शनिवार को महालया से इसकी शुरुआत होगी और रविवार को पहले दिन की पूजा होगी। हुसैनबाद के जगदंबाचौक स्थित यह प्राचीन दुर्गा मंदिर करीब 300 साल पुराना है।
मंदिर के महासच्चिव और संरक्षक विनय गुप्ता के मुताबिक, इस मंदिर की स्थापना उनके पूर्वजों परस लाल और के. लाल एस्टेट ने की थी। के. लाल एस्टेट ने जमीन दी थी और जमींदारी प्रथा के समय महाशय देवरी की स्थापना के तुरंत बाद परस लाल ने पूजा-पाठ शुरू कराया था। इतिहास में यह मंदिर भागलपुर जिले और बांका जिले के रजौन तक के भक्तों के लिए आस्था का केंद्र रहा है। आज भी जगदऔर पुरैनी और बालुआचक के लोग पारंपरिक 'खोइंचा' चढ़ाने आते हैं।
मंदिर का कई बार जीर्णोद्धार हुआ है। अनिरुद्ध प्रसाद गुप्ता, घनश्याम गुप्ता, बाबू जगेश्वर सिंह और गंगा प्रसाद ने इसका बड़ा पुनर्निर्माण कराया था। इसके बाद 2014 में स्थानीय पार्षद चुनाव जीतने के बाद विनय गुप्ता ने फिर से जीर्णोद्धार कराया। मूर्तिकार बाबू साहब इस समय उत्सव के लिए दुर्गा की मूर्ति बना रहे हैं और मंदिर परिसर को कोलकाता के फूलों से सजाया जाएगा।
नवरात्रि के दौरान दस दिनों तक अनुष्ठान होंगे। पहले दिन से दशमी तक सांस्कृतिक 'भक्ति जागरण' कार्यक्रम होंगे। अष्टमी और नवमी पर एक खास परंपरा के तहत बाईपास, पुरैनी और जगदीशपुर जैसे इलाकों से हजारों महिलाएं देवी की पिंडी पर 'खोइंचा' चढ़ाने के लिए इकट्ठा होती हैं। यह मंदिर आपसी भाईचारे की मिसाल है क्योंकि हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग भजन-कीर्तन में हिस्सा लेते हैं और आयोजन में मदद करते हैं। मन्नत पूरी होने पर मुंडन संस्कार और एक खास बलि प्रथा जिसमें जानवरों को चिन्हित कर छोड़ दिया जाता है, दोनों समुदायों द्वारा निभाई जाती है। मुख्य आयोजकों में अध्यक्ष प्रह्लाद साह, मेडहपति योगेश साह, मनीष कुमार, पुजारी मनीष कुमार, स्वयंसेवक महिंद्रा यादव और संरक्षक मनोज कुमार सिंह शामिल हैं।