शिशु मंदिर योजना के 75 साल पूरे होने पर मनेगा अमृत महोत्सव

भागलपुर के चंपानगर स्थित पूरनमल बाजोरिया शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में चल रहे अभ्यास वर्ग का चौथा दिन शानदार रहा। इस कार्यक्रम की शुरुआत दीप जलाकर की गई जिसमें कई बड़े अधिकारी और विधायक शामिल हुए।
इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- सरस्वती शिशु मंदिर योजना के 75 वर्ष पूरे होने पर पूरे देश में अमृत महोत्सव मनेगा।
- इसकी स्थापना 1952 में राष्ट्रीय स्वयंसेवकों द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में काम करने के लिए की गई थी।
- इसका मुख्य लक्ष्य राष्ट्रभक्ति और हिंदुत्वनिष्ठ बच्चों का निर्माण करना है।
अमृत महोत्सव और इतिहास
अखिल भारतीय मंत्री ब्रह्माजी राव ने घोषणा की कि सरस्वती शिशु मंदिर योजना के 75 वर्ष पूर्ण होने वाले हैं, जिसे पूरे देश में अमृत महोत्सव के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाएगा। उन्होंने इसके इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवकों ने शिक्षा के क्षेत्र में युगांतरकारी कार्य करने के लिए 1952 में इसकी स्थापना की थी। राष्ट्र के पुनर्निर्माण के लिए इसे आवश्यक समझा गया और समाज को आधार मानकर, किसी भी सरकारी सहायता के बिना मैकाले शिक्षा पद्धति के विरुद्ध शिशु मंदिर की शुरुआत की गई थी। उन्होंने आगे कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर योजना विद्या भारती की जड़ है। संघ की प्रेरणा से प्रारंभ होने वाली इस योजना का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रभक्ति एवं हिंदुत्वनिष्ठ बालकों का निर्माण करना है।
आर्थिक प्रबंधन और शिक्षा नीति
क्षेत्रीय मंत्री राम अवतार नारसरिया ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक प्रबंधन केवल पैसों का लेन-देन नहीं है, अपितु यह हमारे दैनिक जीवन का संपूर्ण आर्थिक व्यवहार है। उन्होंने विषयों की पुनरावृत्ति पर जोर देते हुए कहा कि जब हम किसी विषय पर बार-बार चर्चा नहीं करते हैं, तो विस्मृति आने लगती है। इसलिए महत्वपूर्ण विषयों को बार-बार याद करना और उन पर मंथन करना अत्यंत आवश्यक है। झारखंड के प्रदेश मंत्री ब्रजेश कुमार ने अपने संबोधन में प्राचीन गुरुकुल पद्धति की शिक्षा के महत्व को रेखांकित किया। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को विस्तारपूर्वक समझाते हुए इसके सफल क्रियान्वयन पर बल दिया।
कुटुंब प्रबोधन और उपस्थिति
इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम द्वारा उपस्थित जनसमूह का कुटुंब प्रबोधन किया गया। उन्होंने भारतीय संस्कृति के छह प्रमुख स्तंभों—भाषा, भूषा, भोजन, भजन, भवन एवं भ्रमण के बारे में विस्तार से जानकारी दी और इन्हें अपने जीवन में उतारने का आह्वान किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्यालीराम, दक्षिण बिहार के प्रदेश मंत्री नरेंद्र कुमार सिंह, झारखंड के प्रदेश सचिव नकुल कुमार शर्मा, उत्तर बिहार के प्रदेश सचिव रामलाल सिंह, सह प्रांत प्रचारक आशीष जी, भाजपा नेत्री प्रीति शेखर, मृणाल शेखर, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. राजेश कुमार वर्मा, विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य अमरेश कुमार, उमाशंकर पोद्दार, ब्रह्मदेव प्रसाद, सतीश कुमार सिंह, निर्माल्य कुमार, मीडिया प्रभारी अजीत कुमार दुबे, शशि भूषण मिश्र सहित कुल 40 पूर्णकालिक कार्यकर्ता एवं महाविद्यालय के प्राध्यापक मुख्य रूप से उपस्थित रहे।