भागलपुर: बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने के लिए तैयार होगी 'अंगिका बाल पोथी'

किलकारी बिहार बाल भवन ने बच्चों के लिए 'अंगिका बाल पोथी' के ड्राफ्ट की समीक्षा की और लिपि व स्वरों पर मुहर लगाई।

Puja Singh5 November 20261 min read0 viewsCity Local
भागलपुर: बच्चों को अपनी मातृभाषा से जोड़ने के लिए तैयार होगी 'अंगिका बाल पोथी'

भागलपुर के कंपनीबाग स्थित किलकारी बिहार बाल भवन में गुरुवार को एक खास बैठक हुई, जिसका मकसद बच्चों को उनकी मातृभाषा से जोड़ना है। इस बैठक में अंगिका बाल पोथी के पहले ड्राफ्ट की समीक्षा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत में मंडल कार्यक्रम समन्वयक साहिल राज ने बताया कि इस किताब को बेहद सरल और बच्चों के अनुकूल भाषा में तैयार किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों, स्थानीय कहानियों और सांस्कृतिक परिवेश को आसानी से समझ सके।

लिपि और स्वरों पर बनी सहमति, विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

बैठक के दौरान भाषा और लिपि को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। समिति ने आधिकारिक तौर पर अंगिका के लिए 'अर्धचंद्र' लिपि के उपयोग को मंजूरी दी। साथ ही, लिपि में तीन नए स्वर ध्वनियों—'ऑ', 'ऍ' और 'ओॅ' को शामिल करने पर भी सहमति बनी। इस किताब का प्रकाशन स्वयं किलकारी बिहार बाल भवन द्वारा किया जाएगा।

समीक्षा बैठक में जिला कला एवं संस्कृति अधिकारी अंकित रंजन ने जोर दिया कि किताब में लोक जीवन, संस्कृति और डिजिटल तकनीकी पहलुओं का समावेश होना चाहिए। वहीं, टीएमबीयू (TMBU) के सहायक प्रोफेसर डॉ. मंजीत सिंह किंवर और डॉ. दिव्यानंद ने वर्तनी और उच्चारण में एकरूपता बनाए रखने की सलाह दी। डॉ. मनोज मीता और डॉ. गौतम यादव ने लोकप्रिय लोक शब्दों को शामिल करने पर जोर दिया, जबकि डॉ. शोभा कुमारी ने सुझाव दिया कि सामग्री तीसरी से पांचवीं कक्षा के छात्रों के स्तर के अनुरूप होनी चाहिए। डिजिटल पहलुओं पर प्रोग्रामर सुधीर कुमार ने अपने विचार साझा किए।

कार्यक्रम का माहौल काफी पारंपरिक रहा, जहां मेहमानों का स्वागत तिलक और हाथ से बने गुलदस्तों से किया गया। बैठक के अंत में सभी विशेषज्ञों को सम्मान के तौर पर 'अंगवस्त्र' भेंट किए गए। इस अवसर पर यशस्वी निधि सहित कई अन्य सदस्य मौजूद रहे।

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