बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर ने देश भर में श्री अन्न यानी मिलेट्स को बढ़ावा देने के लिए एक नई शुरुआत की है। कुलपति प्रोफेसर दुनी राम सिंह के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय किसानों को ब्रांडिंग, पैकेजिंग और मार्केटिंग फार्मूला अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है ताकि कच्चे मिलेट्स को मूल्य वर्धित उत्पादों में बदलकर उनकी आर्थिक स्थिति सुधारी जा सके। BAU के सभी कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों को निर्देश दिया गया है कि वे किसानों को मिलेट्स आधारित उत्पादन और व्यापार के अवसरों के बारे में सिखाएं ताकि उत्पाद स्थानीय बाजार की मांग के अनुसार आसानी से बिक सकें।
अब तक 325 से अधिक महिलाओं को मिलेट्स से मूल्य वर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण मिल चुका है। विश्वविद्यालय उचित बाजार मूल्य सुनिश्चित करने के लिए ब्रांडिंग और पैकेजिंग में तकनीकी सहायता भी दे रहा है। यह पहल पारंपरिक खाद्य पदार्थों से आगे बढ़कर उत्पादों में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित करती है। प्रशिक्षण मॉड्यूल में बिस्कुट, कुकीज़, लड्डू, स्नैक्स, आटा और दलिया का उत्पादन शामिल है। इसके अलावा BAU ने एक मिलेट्स आधारित मैगी उत्पाद भी विकसित किया है जो अभी व्यावसायिक लॉन्च के लिए सुधार की प्रक्रिया से गुजर रहा है।
वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय इन उत्पादों की गुणवत्ता, पोषण मूल्य और पेशेवर पैकेजिंग को प्राथमिकता दे रहा है ताकि उन्हें बाजार में पहचान मिल सके। BPM तकनीक को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह किसानों को केवल फसल की खेती से आगे बढ़ाकर छोटे पैमाने के स्थानीय उद्योगों और स्वरोजगार के अवसर पैदा करे। कुलपति प्रोफेसर दुनी राम सिंह के अनुसार विश्वविद्यालय किसान के नेतृत्व वाले इन उपक्रमों की सफलता और लाभप्रदता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय रूप से विपणन चैनल स्थापित कर रहा है।