BAU सबौर ने मंदिर के फूलों से बनाया स्किन फ्रेंडली गुलाल, होली पर नहीं होगा त्वचा को नुकसान

Hariom Mishra3 March 20262 min read28 viewsCity Local
BAU सबौर ने मंदिर के फूलों से बनाया स्किन फ्रेंडली गुलाल, होली पर नहीं होगा त्वचा को नुकसान

भागलपुर के सबौर में स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) ने मंदिरों में चढ़ने वाले फूलों के कचरे से प्राकृतिक और स्किन फ्रेंडली गुलाल तैयार किया है। इस पहल को गॉड टू गॉड (God to God) थीम का नाम दिया गया है जिसमें भगवान पर अर्पित फूल वापस गुलाल के रूप में उन्हीं के चरणों में पहुंच रहे हैं। यह गुलाल पूरी तरह से केमिकल फ्री है और इसे बनाने में गेंदा, गुलाब, मोगरा, अपराजिता और पलाश जैसे फूलों का उपयोग किया गया है।

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फूलों से बने हर्बल गुलाल की मुख्य खासियत और रंग

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यूनिवर्सिटी के फ्लोरीकल्चर विभाग की डॉक्टर दीप्ति सिंह के नेतृत्व में यह गुलाल तैयार किया गया है। इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शेल्फ लाइफ है जो तीन साल तक चलती है। यह सामान्य ऑर्गेनिक रंगों की तुलना में काफी अधिक है। इसमें उपयोग किए गए प्राकृतिक तेल त्वचा के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं।

गुलाल का रंग उपयोग किए गए फूल
पीला गेंदा (Marigold)
गुलाबी और लाल गुलाब, हिबिस्कस और पलाश
नीला अपराजिता (Aparajita)
सफेद मोगरा (Mogra)

बाजार में बढ़ी मांग और महिलाओं को मिला रोजगार

होली 2026 के नजदीक आते ही इस हर्बल गुलाल की मांग में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। यूनिवर्सिटी अब स्थानीय महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को इसे बनाने की ट्रेनिंग दे रही है ताकि वे इसे रोजगार के रूप में अपना सकें।

  • बाजार में इस उच्च श्रेणी के हर्बल गुलाल की कीमत 100 से 250 रुपये प्रति किलो के आसपास रहती है।
  • गुलाल के साथ यूनिवर्सिटी फूलों के कचरे से ग्रीटिंग कार्ड, बुकमार्क और टेबल मैट भी बना रही है।
  • इसका मुख्य लक्ष्य मंदिर के कचरे को गंगा जैसी नदियों में जाने से रोकना और प्रदूषण कम करना है।
  • इस गुलाल को पहली बार किसान मेला 2025 में बिहार के राज्यपाल द्वारा लॉन्च किया गया था।
  • यह गुलाल कॉर्न स्टार्च और फूलों के अर्क से बना है जो आंखों और बालों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है।
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