बड़ी खबर: गंगा और कोसी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन ने रद्द की सभी कर्मचारियों की छुट्टियां

भागलपुर जिला प्रशासन ने गंगा और कोसी नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सभी अधिकारियों और कर्मियों की छुट्टियां तुरंत प्रभाव से रद्द कर दी हैं। प्रशासन ने सभी कर्मचारियों को राहत कार्यों में मदद करने के लिए अपने मुख्यालय में रहने का आदेश दिया है। जल संसाधन विभाग ने 1 जून से 31 अक्टूबर तक बाढ़ सुरक्षा कार्य में लगे अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी है और इस दौरान इंजीनियरों की मोबाइल से निगरानी की जाएगी। जिला मजिस्ट्रेट अलंकृत पांडेय ने हाल ही में राघोपुर और खरीक में बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण करने तथा पेयजल, स्वच्छता और सामुदायिक रसोई जैसी जरूरी सेवाओं को चालू रखने का आदेश दिया। 28 अगस्त 2026 तक, खरीक के बाढ़ प्रभावित इलाकों में चार सामुदायिक रसोई चल रही हैं, जहां लगभग 2,700 लोगों को खाना खिलाया गया है।
गंगा और कोसी का जलस्तर और खतरे का निशान
गंगा पर स्पर संख्या 7 पर जलस्तर 32.21 मीटर दर्ज किया गया, जो 31.60 मीटर के खतरे के निशान से 61 सेंटीमीटर ऊपर है। शुक्रवार को सुबह 6:00 बजे भागलपुर शहर में जलस्तर 33.52 मीटर दर्ज किया गया, जो 33.68 मीटर के खतरे के निशान से 16 सेंटीमीटर नीचे था। कुछ इलाकों में स्थिति सुधरने के बावजूद नौगछिया, नाथनगर और कहलगांव के निचले इलाकों के लोगों को अभी भी बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। राघोपुर जमींदारी बांध के पास कटाव जारी है जिससे हाई-लेवल रेलवे स्टेशन को खतरा बना हुआ है। स्पर 8 और 9 के बीच रिसाव और बारिश से कटाव मिलने के बाद इस्माइलपुर-बिंद टोली बांध पर मुश्किलें बढ़ गई हैं।
नावों के संचालन के लिए कड़े निर्देश और राहत कार्य
सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने नावों के संचालन के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत सभी सरकारी नावों पर लाल झंडा और फ्री सर्विस लिखा होना जरूरी है। क्षमता की सीमा का सख्ती से पालन किया जा रहा है। इसके अलावा, भागलपुर नगर निगम प्रभावित इलाकों में सफाई, फॉगिंग और ब्लीचिंग का काम शुरू करने की योजना के साथ राहत शिविर बनाने के लिए आपदा प्रबंधन के निर्देशों का इंतजार कर रहा है। वहीं, तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) के प्रशासनिक भवन पर भी बाढ़ का पानी मंडराने लगा है जिससे कामकाज में बाधा आ सकती है।