भागलपुर के समीक्षा भवन में शुक्रवार को अभियोजन, स्पीडी ट्रायल और शराबबंदी को लेकर एक समीक्षा बैठक की गई। इस बैठक में लंबित मामलों के जल्द निपटारे, गंभीर मामलों में प्रभावी कार्रवाई और पुलिस व कानूनी अधिकारियों के बीच तालमेल बेहतर करने पर जोर दिया गया। बैठक की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं: - समीक्षा बैठक में कुल 686 मामलों का निपटारा किया गया। - अधिकारियों ने हर अभियोजन अधिकारी को हर महीने कम से कम पांच मामलों के निपटारे का लक्ष्य दिया है। - स्पीडी ट्रायल के सभी मामलों को जल्द सुलझाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
बैठक में जघन्य अपराधों, पॉक्सो एक्ट, एससी-एसटी एक्ट, एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट और एक्साइज एक्ट से जुड़े मामलों के अभियोजन की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने इन मामलों में तेजी से कार्रवाई करने, मजबूत कानूनी पैरवी करने और गवाहों को समय पर पेश करने के निर्देश दिए।
समीक्षा अवधि के दौरान
कुल 686 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें
71 सजा,
82 बरी और
समझौते के जरिए 533 मामलों का समाधान शामिल है। यह प्रदर्शन पिछले महीने की तुलना में काफी बेहतर है, जिसमें 527 मामलों का निपटारा हुआ था। इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए अधिकारियों ने आदेश दिया है कि हर अभियोजन अधिकारी और अभियोजक हर महीने कम से कम पांच मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखें। स्पीडी ट्रायल के सभी मामलों को जल्द सुलझाने को प्राथमिकता दी गई है।
मुख्य फोकस अभियोजन की गुणवत्ता और गति में सुधार करने, चार्जशीट और केस डायरी समय पर जमा करने, और पुलिस तथा अभियोजन विभाग के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर था। अधिकारियों ने इन लक्ष्यों की नियमित निगरानी के आदेश दिए ताकि अभियोजन प्रक्रिया प्रभावी बनी रहे। इस बैठक में अपर जिला मजिस्ट्रेट (विधि-व्यवस्था), वरिष्ठ उप कलेक्टर, जिला विधि शाखा के प्रतिनिधि, मुख्य अभियोजन अधिकारी, लोक अभियोजक और सभी अपर व विशेष लोक अभियोजक शामिल हुए।