भागलपुर में हवा हुई ज़हरीली, सैंडिस और लाजपत पार्क में टहलने वालों का धूल से दम घुटना शुरू, AQI पहुंचा 216 के पार

Pooja Kanjani12 March 20262 min read28 viewsCity Local
भागलपुर में हवा हुई ज़हरीली, सैंडिस और लाजपत पार्क में टहलने वालों का धूल से दम घुटना शुरू, AQI पहुंचा 216 के पार

भागलपुर शहर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया है। सैंडिस कंपाउंड और लाजपत पार्क जैसे प्रमुख इलाकों में सुबह और शाम टहलने वाले लोग धूल और खराब हवा से सबसे ज्यादा परेशान हैं। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) वर्तमान में 181 से लेकर 216 के बीच दर्ज किया गया है। हवा में PM 2.5 और PM 10 की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक होने के कारण बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और एलर्जी जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदूषण के प्रमुख कारण और प्रभावित इलाके

शहर की मुख्य सड़कों पर धूल की मोटी परतें जम गई हैं जो वाहनों के चलने पर हवा में फैल जाती हैं। बरारी से तिलकामांझी और खंजरपुर रूट पर 2 से 4 इंच तक धूल देखी जा रही है। प्रदूषण बढ़ने के पीछे कई मुख्य वजहें सामने आई हैं:

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  • NH-80 बायपास और भोलानाथ पुल का चल रहा निर्माण कार्य।
  • सड़कों के किनारे कचरे के ढेरों में लगाई जाने वाली आग।
  • गंगा किनारे से अवैध बालू की ढुलाई जिससे सड़कों पर रेत गिरती है।
  • स्मार्ट सिटी होने के बावजूद एंटी-स्मॉग गन और पानी के छिड़काव की कमी।

प्रशासनिक तैयारी और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी

नगर निगम ने हाल ही में 9 मार्च 2026 को वार्ड 4 से 8 के लिए स्वच्छता टेंडर निकाला है और नए बजट में इंदौर मॉडल को अपनाने की बात कही गई है। हालांकि धरातल पर सफाई की स्थिति अभी भी खराब बनी हुई है। पटना हाई कोर्ट भी बिहार के शहरों की वायु गुणवत्ता पर नजर रख रहा है।

डॉक्टर आर.के. सिन्हा जैसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि प्रदूषण के चरम स्तर के दौरान बाहर जाने से बचें। विशेष रूप से सुबह जल्दी और देर शाम को पार्क में टहलना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

प्रदूषण मानक वर्तमान स्थिति (Bhagalpur) WHO की गाइडलाइन
Air Quality Index (AQI) 181 – 216 (Poor) 50 से कम
PM 2.5 Level 87 – 105 µg/m³ 5 µg/m³
PM 10 Level 113 – 128 µg/m³ 15 µg/m³

धूल नियंत्रण के लिए सरकारी नियम

नेशनल क्लीन Air प्रोग्राम (NCAP) के नियमों के अनुसार निर्माण स्थलों पर पानी का छिड़काव करना और निर्माण सामग्री को तिरपाल से ढकना अनिवार्य है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर 10,000 रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। डीएम डॉ. नवल किशोर चौधरी ने भी स्मार्ट सिटी के अधिकारियों को सैंडिस कंपाउंड के रखरखाव और स्वच्छता को लेकर चेतावनी जारी की है। स्थानीय निवासी मांग कर रहे हैं कि फुटपाथों की नियमित सफाई और सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपर का उपयोग बढ़ाया जाए।

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