अरे भगवान! क्षमता पूरी होने से भागालपुर में रोकनी पड़ी कुत्तों की नसबंदी

MyBhagalpur Team31 August 20262 min read30 viewsCity Local
अरे भगवान! क्षमता पूरी होने से भागालपुर में रोकनी पड़ी कुत्तों की नसबंदी

भागलपुर नगर निगम का एनिमल बर्थ कंट्रोल यानी एबीसी प्रोग्राम रविवार 30 अगस्त 2026 को थोड़े समय के लिए रोक दिया गया क्योंकि केंद्र में कुत्तों को रखने की जगह भर गई थी। भूतनाथ रोड पर मटेरियल रिकवरी फैसिलिटी यानी एमआरएफ सेंटर पर बने इस अस्थायी केंद्र में सिर्फ 10 केनेल हैं जिनमें 40 से 50 कुत्ते रह सकते हैं। सभी केनेल भरे होने के कारण वीकेंड पर टीम और कुत्ते नहीं पकड़ पाई। प्रोग्राम के स्टाफ ने बताया है कि सोमवार 31 अगस्त 2026 को यह अभियान फिर से शुरू किया जाएगा क्योंकि तीन केनेल खाली होने की उम्मीद है।

अभियान की जानकारी और काम करने का तरीका

यह एबीसी अभियान जयपुर की संस्था 'संतुलन जीव कल्याण' चला रही है। इसकी शुरुआत 23 अगस्त 2026 को हुई थी। पटना के बाद भागलपुर बिहार का दूसरा जिला है जहां यह प्रोग्राम शुरू हुआ है। इस योजना का मकसद आवारा कुत्तों की संख्या को नियंत्रित करना और रेबीज के खतरे को कम करना है। इसके तहत कुत्तों को पकड़कर उनकी नसबंदी और टीकाकरण किया जाता है। एजेंसी को हर दिन 30 से 40 कुत्तों का लक्ष्य दिया गया है। पकड़े गए कुत्तों को ऑपरेशन के बाद देखभाल के लिए लगभग एक हफ्ते तक रखा जाता है और फिर उन्हें वापस वहीं छोड़ दिया जाता है जहां से उन्हें पकड़ा गया था।

भुगतान के नियम और आगे की योजना

इस प्रोग्राम में पैसों का हिसाब बहुत सख्त है। नगर निगम एजेंसी को हर एक कुत्ते के हिसाब से 1,610 रुपये देता है। बिल में कोई गड़बड़ी न हो इसलिए निगम ने यह नियम बनाया है कि एजेंसी को निकाले गए अंगों को एक केमिकल में रखना होगा। नगर निगम के अधिकारी पैसे देने से पहले इनकी भौतिक जांच करते हैं। अभी यह एमआरएफ सेंटर अस्थायी रूप से चल रहा है लेकिन भागलपुर नगर निगम कनाकाथी डंपिंग ग्राउंड में एक पक्का और आधुनिक एबीसी सेंटर और डॉग शेल्टर बनाने की योजना बना रहा है। इस नए सेंटर पर करीब 1.10 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके छह महीने में पूरा होने की उम्मीद है।

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