भागलपुर में 86.17 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण कार्य 15 महीने की देरी से चल रहा है। इस खबर में जानिए पुल निर्माण में आ रही बाधाओं और विभाग की मुश्किलों के बारे में पूरी जानकारी।
- 86.17 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है फ्लाईओवर।
- 15 महीने की देरी से चल रहा है निर्माण कार्य।
- इशाकचक पिलर के पास ट्रैफिक और जाम के कारण काम बंद है।
- मालदा रेलवे डिवीजन से गर्डर लॉन्चिंग की मंजूरी का इंतजार है।
भागलपुर में भोलानाथ फ्लाईओवर का निर्माण कार्य अभी काफी पिछड़ गया है। मुख्य समस्या इशाकचक पिलर पर है, जहां ट्रैफिक रुकने और जनता के विरोध के डर से काम बंद पड़ा है। बिहार राज्य पुल निर्माण निगम (BSBCCL) के सामने बड़ी मुश्किल यह है कि क्या दिन-रात काम करने के लिए सड़क को 10 दिन के लिए बंद किया जाए या कोई दूसरा रास्ता निकाला जाए। दूसरी तरफ, मालदा रेलवे डिवीजन ने अभी तक गर्डर लॉन्चिंग के लिए मंजूरी नहीं दी है। इस आपसी तालमेल की कमी पर निगम और रेलवे दोनों अधिकारी चुप हैं। इशाकचक पिलर के लिए पाइलिंग का काम पूरा हो चुका है, लेकिन मुख्य सड़क को बंद किए बिना सुपरस्ट्रक्चर और पिलर कास्टिंग का काम आगे नहीं बढ़ सकता है।
इस प्रोजेक्ट के लिए अभी तक
35 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया जा चुका है। इस प्रोजेक्ट को जून 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अब नई रिपोर्ट के मुताबिक इसे पूरा होने में दिसंबर 2026 या 2028 तक का समय लग सकता है। BSBCCL के चेयरमैन धर्मेंद्र कुमार ने इस देरी पर नाराजगी जताई है और पूरी विभागीय रिपोर्ट मांगी है। सड़क निर्माण मंत्री के हालिया दौर से थोड़ा फायदा हुआ है, जिससे 22 पिलर पर गर्डर रख दिए गए हैं और 18 अन्य के लिए हैमरहेड तैयार हो चुके हैं।
मिर्जानहट, इशाकचक और नयाचक के स्थानीय लोग जलभराव, गंदगी और ट्रैफिक जाम की समस्याओं से बहुत परेशान हैं। स्थानीय विधायक रोहित पांडेय ने मौके का दौरा करके अधिकारियों को वैकल्पिक रास्ते बनाने और जल निकासी सुधारने का निर्देश दिया है। रेलवे से स्ट्रक्चरल ड्राइंग मिलने में देरी और जमीन अधिग्रहण की अड़चनों ने काम को और मुश्किल बना दिया है। हालांकि, रेलवे ने 29 दिसंबर 2025 को कुछ खास इलाकों के लिए एनओसी दे दी है जिससे जमीन अधिग्रहण का काम शुरू हो सके। आगे की योजना के तहत भोलानाथ फ्लाईओवर को सिटी मास्टर प्लान के तहत बनने वाले चार लेन वाले लोहिया पुल से जोड़ा जाएगा जिससे यातायात बेहतर हो सके।