भागलपुर में मां दुर्गा को अश्रुपूर्ण विदाई, नम आँखों से दी गई अंतिम विदाई

भागलपुर में गुरुवार को दस दिनों की पूजा और उत्सव के बाद मां दुर्गा को भावुक विदाई दी गई। शहर भर के मंदिरों और पंडालों में पूरे दिन अनुष्ठान, मंत्रोच्चार और प्रसाद वितरण का दौर चलता रहा। दोपहर तक शहर की सड़कों पर पारंपरिक प्रस्तुतियों और जय माँ अम्बे तथा जय जगदंबे के जयकारों के साथ विसर्जन जुलूस निकलने लगे।
दुर्गा पूजा महासमिति के बैनर तले मुख्य जुलूस शाम 4:03 बजे स्टेशन चौक से शुरू हुआ, जिसकी अगुवाई पर्वती पूजा समिति की प्रतिमा ने की। यह जुलूस मुख्य बाजारों और चौराहों जैसे वैरायटी चौक, खलीफाबाग चौक, कोतवाली चौक, नया बाजार, बुढ़नाथ चौक, आदमपुर चौक तथा छोटी और बड़ी खानकाह से होते हुए देर रात मायागंज अस्पताल के पीछे मुशहरी घाट पहुंचा जहाँ प्रतिमा विसर्जन किया गया। महासमिति के बैनर तले कुल 40 प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ, जबकि महासमिति के आधिकारिक जुलूस के बाहर नाथनगर समेत अन्य स्थानों पर 48 अतिरिक्त प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।
पहली प्रतिमा शाम 4:03 बजे स्टेशन चौक पहुँची, जहाँ महापौर डॉ. वसुंधरा लाल ने महाआरती की और समाज में शांति व सौहार्द की प्रार्थना की। इस कार्यक्रम में पूर्व महापौर डॉ. वीणा यादव, महासमिति के संरक्षक कमल जयसवाल, अध्यक्ष अभय घोष सोनू, महासचिव जयनंदन आचार्य, तापस घोष, कार्यकारी अध्यक्ष विनय सिन्हा, कन्हैया लाल, सरोज झा, तरुण घोष, पिंकी बगड़िया, सुनंदा रक्षित और कुणाल सिंह भी उपस्थित थे। गुरुवार को कुल 45 प्रतिमाओं का विसर्जन हुआ।
गुरुवार को मुख्य जुलूस निकलने के बावजूद दुर्गाबाड़ी, कालीबाड़ी और बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी की कुछ प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को ही हो चुका था। जुलूस के पूरे मार्ग में मेले जैसा माहौल रहा, जहाँ चाट, नाश्ता, खिलौने और अन्य सामान बेचने वाले दुकानदारों के पास भारी भीड़ उमड़ी। निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए विसर्जन एक धार्मिक अनुष्ठान और सामुदायिक उत्सव दोनों साबित हुआ, जिससे शहर में आस्था और उत्सव की यादें छोड़ गईं और लोगों ने अगले साल मां के लौटने की उम्मीद के साथ उन्हें विदाई दी।