भागलपुर के बिहपुर ब्लॉक के विक्रमपुर गांव में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर स्थानीय भक्तों के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र बना हुआ है। इस स्थल पर शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की पूजा करने की परंपरा 1938 से चली आ रही है, जिसे आज भी पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।
- 1938 से चली आ रही है शारदीय नवरात्रि में पूजा की परंपरा
- तांत्रिक विधि से पूजा और पशु बलि की है अनोखी परंपरा
- नवमी के दिन सैकड़ों भक्तों की भीड़ ने टेका मत्था
- गांव की एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है यह मंदिर
यह मंदिर तांत्रिक पूजा विधियों के अपने अनूठे पालन और पशु बलि की परंपरा से अलग पहचान रखता है। नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से भर जाता है, जिससे दूर-दराज के इलाकों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां का आशीर्वाद लेने आते हैं। नवमी के दिन सैकड़ों भक्त इस स्थल पर पूजा-अर्चना करने के लिए एकत्र हुए।
मंदिर के पुजारी पंडित विकास कुमार झा ने बताया कि जो भक्त सच्चे मन से मंदिर आते हैं, मां दुर्गा उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। यही कारण है कि यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। इसके धार्मिक महत्व के अलावा, यह मंदिर गांव की एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है। यह पुरानी परंपरा युवा पीढ़ी को उनकी धार्मिक विरासत से जोड़ती है.