भागलपुर: जन्म प्रमाण पत्र के लिए बच्चों के नाम बदलने पर मजबूर माता-पिता
भागलपुर नगर निगम के सख्त जन्म पंजीकरण नियमों से परेशान माता-पिता अब बच्चों के नाम बदलकर सर्टिफिकेट पाने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार के भागलपुर में जन्म प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया इतनी जटिल हो गई है कि अब माता-पिता अपने बच्चों के नाम तक बदलने को तैयार हैं। भागलपुर नगर निगम द्वारा दो साल से अधिक उम्र के बच्चों के जन्म पंजीकरण के लिए लागू किए गए सख्त नियमों ने अभिभावकों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। स्कूल एडमिशन के लिए सर्टिफिकेट की जरूरत है, लेकिन सरकारी कागजी कार्रवाई के जाल ने लोगों को इस हद तक धकेल दिया है कि वे नए नाम से आवेदन कर उम्र की सीमा से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
दरअसल, पहले जन्म प्रमाण पत्र के लिए साधारण हलफनामे (Affidavit) से काम चल जाता था, लेकिन अब नियमों को पूरी तरह बदल दिया गया है। अब यदि बच्चे की उम्र दो साल से ज्यादा है, तो नगर निगम प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश और औपचारिक कोर्ट वेरिफिकेशन की मांग कर रहा है। इस लंबी और थकाऊ प्रक्रिया से बचने के लिए लोग शॉर्टकट अपना रहे हैं। बरारी की पूनम रानी और अदमपुर की रुचि कुमारी जैसे कई अभिभावकों ने अपनी परेशानी साझा की है। रुचि का चार साल का बेटा अयांश है, जिसका सर्टिफिकेट इस नई प्रक्रिया के कारण अटका हुआ है।
पंजीकरण के नए और सख्त नियम
नगर निगम ने पंजीकरण के लिए समय सीमा के आधार पर अलग-अलग शर्तें तय की हैं, जो इस प्रकार हैं:
- 21 दिनों के भीतर: यह मानक प्रक्रिया है और निःशुल्क है।
- 21 से 30 दिनों के बीच: इसमें विलंब शुल्क और जरूरी दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।
- एक से दो साल के बीच: इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट, एसडीएम या अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट से लिखित आदेश और सत्यापन जरूरी है।
- दो साल से अधिक: अब इसके लिए कोर्ट की प्रक्रिया अनिवार्य है, जिसमें प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश आवश्यक है।
इन कड़े नियमों के कारण नगर निगम कार्यालय में हर दिन भारी भीड़ उमड़ रही है और लोग विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटने में समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहे हैं, जिसके चलते वे मजबूरन अपने बच्चों की पहचान बदलने जैसा कदम उठा रहे हैं ताकि उनके बच्चों का भविष्य और शिक्षा प्रभावित न हो।