भागलपुर शहर में शारदीय नवरात्र और विजयादशमी का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान शहर में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान हुए। कार्यक्रमों में बंगाली नाटक, ढाक की थाप, बनारस के कलाकारों के डांस-ड्रामा और 11 तरह के खाने का भोग लगाया गया, जिससे कला, संस्कृति और आपसी भाईचारा देखने को मिला।
ऐतिहासिक दुर्गबाड़ी और मशकचक परिसर में सचिव सुजय सर्बधिकारी ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान कलश स्थापना के साथ शुरू हुए। षष्ठी के दिन बच्चों की चित्रकला प्रतियोगिता से सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। सप्तमी पर बच्चों और युवाओं के लिए डांस प्रतियोगिता और सांस्कृतिक शाम का आयोजन किया गया। अष्टमी को दोपहर 2:30 बजे संधि पूजा हुई, जिसमें भारी भीड़ जुटी। नवमी की सुबह शंख ध्वनि प्रतियोगिता हुई और दशमी के दिन पुरस्कार बांटे गए। दुर्गबाड़ी कमेटी ने सप्तमी और नवमी को खिचड़ी तथा अष्टमी को पुलाव का भोग लगाया।
जुबक संघ द्वारा आयोजित मारवाड़ी पाठशाला पंडाल में सचिव बबन साहा ने बताया कि षष्ठी को कलश बोधन हुआ, जिसके बाद सप्तमी को प्राण प्रतिष्ठा और अष्टमी को संधि पूजा हुई।
अष्टमी की रात 8:00 बजे ढाक प्रतियोगिता इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। नवमी की रात 8:00 बजे कमेटी ने आयोजकों और वॉलंटियर्स को सम्मानित करने के लिए पुरस्कार समारोह रखा।
मुंडीचक गढ़ैया में सचिव कुमार धर्मेंद्र ने बताया कि पूजा कमेटी ने सप्तमी के दिन माता भगवानी को 11 तरह के व्यंजनों का भोग लगाया। अष्टमी को निशा पूजा हुई, नवमी को हलवा का भोग लगा और दशमी के दिन कलश विसर्जन के साथ अनुष्ठान पूरे हुए। वहीं, मोहिदीनचक दुर्गा स्थान पर षष्ठी के दिन भगवती जागरण आयोजित करने के लिए स्थानीय महिलाओं का सम्मान किया गया। सप्तमी पर स्थानीय बाल कलाकारों ने प्रस्तुति दी, जिसके बाद अष्टमी को बनारस और स्थानीय कलाकारों ने मिलकर डांस-ड्रामा पेश किया। नवमी के दिन कलाकारों ने भगवती जागरण किया और दशमी को समाज को संदेश देने वाला नाटक खेला गया।