शारद पूर्णिमा पर भागलपुर में गूंजे मंत्र, गंगा तट पर उमड़ी भीड़

भागलपुर में आज रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा और वार्षिक लक्खी पूजा बहुत ही धूमधाम और धार्मिक माहौल के साथ मनाई जा रही है। शहर भर में कई जगहों पर धार्मिक अनुष्ठान हो रहे हैं। इस खबर से जुड़ी मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
- बड़ी संख्या में भक्तों ने गंगा नदी के तट पर पहुंचकर पवित्र स्नान किया।
- क्षेत्र के सभी घरों में बहुत भक्ति के साथ कोजागर पूजन किया जा रहा है।
- दुर्गा बाड़ी, काली बाड़ी और युवक संघ जैसी कई प्रमुख संस्थाओं द्वारा मूर्तियां स्थापित की गई हैं और औपचारिक पूजा अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
काली बाड़ी में विशेष पूजा और प्रसाद
काली बाड़ी में जनरल सेक्रेटरी विलास बागची ने बताया कि इस अनुष्ठान में सत्यनारायण पाठ और देवी लक्ष्मी को विशेष भोग शामिल हैं। भोग में चावल का लावा, नारियल के लड्डू, तिल के लड्डू, चूड़ा, दही, खीर-पूरी और हलवा शामिल है। काली बाड़ी में सभी तैयारियां प्रेसिडेंट डॉ. सुजाता शर्मा, जनरल सेक्रेटरी विलास बागची और कमेटी के सदस्य तापस घोष, रजत मुखर्जी, बाबू मुखर्जी और परिमल कंसोबनिक की देखरेख में चल रही हैं।
बंगाली बहुल इलाकों में खास रौनक
चंपानगर बंगाली टोला, माशकचक, खरमनचक, मुंडीचक, मणिक सरकार घाट रोड, बड़ी खंजरपुर और बरारी रिफ्यूजी कॉलोनी जैसे बंगाली बहुल इलाकों में उत्सव का माहौल बहुत खास है। इसके अलावा बरारी काजीपाड़ा कॉलोनी में सामूहिक पूजा का आयोजन अशोक सरकार के सहयोग से किया जा रहा है और सिंहबाड़ी में तरुण घोष इसे संभाल रहे हैं। बंगाली समुदाय इस अवसर पर नए गहने और बर्तन खरीदने की पारंपरिक प्रथा का भी पालन कर रहा है।
मंदिरों और आश्रमों में विशेष कार्यक्रम
आदमपुर के शिव शक्ति मंदिर में विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं, जहां चांदनी रात की रोशनी में खीर को खुले आसमान के नीचे रखा जाएगा। बुर्कानाथ रोड स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर में मैनेजिंग ट्रस्टी विनोद अग्रवाल ने पुष्टि की है कि भगवान श्री रंगनाथ को खीर, पूरी और सब्जी का भोग लगाया जाएगा। कुप्पाघाट स्थित महर्षि मेंही आश्रम में विशेष ध्यान और सत्संग सत्र चल रहे हैं, जबकि दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ने भी खास आध्यात्मिक कार्यक्रम तय किए हैं।
पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त
कोजागर पूजा की पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू हुई थी और यह 26 अक्टूबर 2026 को सुबह 9:41 बजे तक रहेगी। भक्तों का विश्वास है कि आज रात चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के चरम पर है। पूजा के लिए निशीता मुहूर्त 25 अक्टूबर को रात 11:40 बजे से 26 अक्टूबर को रात 12:31 बजे के बीच का है।