भागलपुर में बुराई पर जीत का पर्व, जानिये कैसे हुआ रावण दहन

MyBhagalpur Team21 October 20263 min read0 viewsCity Local
भागलपुर में बुराई पर जीत का पर्व, जानिये कैसे हुआ रावण दहन

बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व विजयादशमी बुधवार को भागलपुर में बहुत धूमधाम से मनाया गया। शहर में पारंपरिक तरीके से रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले जलाए गए। इस साल शहर के बीच के इलाके में भी पुरानी परंपरा फिर से शुरू हुई, जो साल 2008 से बंद थी।

इस खबर के मुख्य बिंदु:

  • हजारों लोगों ने विजयादशमी पर रावण दहन देखा।
  • नाथनगर के सीटीएस मैदान में 30 फीट के पुतले जलाए गए।
  • जिला स्कूल परिसर में साल 2008 के बाद पहली बार रावण दहन हुआ।
  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और भारी पुलिस बल तैनात था।

नाथनगर के ऐतिहासिक मैदान में हुआ पुतला दहन

नाथनगर के ऐतिहासिक सीटीएस मैदान में, जहां यह परंपरा करीब 150 साल पुरानी है, जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) अलंकृता पांडे, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) प्रमोद यादव और अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) विकास कुमार ने रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के 30 फीट ऊंचे पुतलों को जलाने की रस्म पूरी की। डीएम अलंकृता पांडे ने रावण के पुतले में आग लगाई, जबकि एसएसपी यादव और एसडीओ कुमार ने क्रमशः कुंभकरण और मेघनाथ के पुतलों में आग लगाई। डीएम पांडे ने इस आयोजन को सामाजिक सौहार्द और सच्चाई की जीत का प्रतीक बताया, जबकि एसएसपी यादव ने बताया कि शांति बनाए रखने के लिए आरएएफ, सैप और महिला पुलिस बलों सहित सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। इस दौरान सिटी एसपी अतुलेश झा, सिटी डीएसपी-2 राकेश कुमार और नाथनगर अंचल अधिकारी मनोहर कुमार भी मौजूद रहे।

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जिला स्कूल में भी सालों बाद लौटी रौनक

जिला स्कूल परिसर में भी एक महत्वपूर्ण आयोजन हुआ, जहां साल 2008 के बाद पहली बार रावण दहन किया गया। इस समारोह की अध्यक्षता एसडीओ विकास कुमार ने की और इसका आयोजन स्थानीय पार्षद नंदikesh शांडिल्य ने किया। इसमें विधायक रोहित पांडे, मेयर डॉ. वसुंधरा लाल, भाजपा अध्यक्ष संतोष कुमार और पार्षद अश्विनी जोशी मोंटी शामिल हुए। इस कार्यक्रम में सुरताल टीम की प्रस्तुतियां और भगवान राम की झांकी भी दिखाई गई। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने मंगलवार को ही दशहरा मेले का उद्घाटन किया था।

पुरानी परंपराओं की हुई वापसी

ऐतिहासिक रूप से, मध्य भागलपुर में रावण दहन लालाजपत पार्क में होता था, जो साल 1953 से चली आ रही दुर्गा पूजा परंपराओं के लिए जाना जाता है। लेकिन साल 2008 में कानून और व्यवस्था की चिंताओं के कारण प्रशासन ने इस पर रोक लगा दी थी। शहर के बीचों-बीच इस साल का आयोजन इन सांस्कृतिक जड़ों को फिर से जीवित करने वाला रहा। नाथनगर में सामाजिक कार्यकर्ता देवाशीष बनर्जी ने बताया कि रामलीला समिति और विभिन्न स्थानीय पूजा समितियों के सहयोग से यह आयोजन इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का एक मुख्य हिस्सा बना हुआ है।

सुरक्षा और विसर्जन से जुड़ी जानकारी

दोनों मुख्य स्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, जिसमें सीसीटीवी निगरानी, ​​फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और एंबुलेंस शामिल थीं। आयुर्वेद कॉलेज से सीटीएस तक सड़क के दोनों ओर पार्किंग की व्यवस्था की गई थी। भागलपुर के शहरी इलाके में 11 दुर्गा प्रतिमाएं और ग्रामीण इलाकों में 10 और प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। बंगाली रीति-रिवाजों से स्थापित प्रतिमाओं का विसर्जन बुधवार को कर दिया गया, जबकि बाकी प्रतिमाओं का विसर्जन जुलूस शुक्रवार को तय है।

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