भागलपुर के बाजारों में दिवाली की भारी रौनक, मूर्तियों और सजावट की खरीदारी तेज

भागलपुर के बाजारों में दिवाली की खरीदारी चरम पर है। लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों और सजावटी सामानों की भारी मांग देखी जा रही है।

Talat Praveen7 November 20262 min read0 viewsCity Local
भागलपुर के बाजारों में दिवाली की भारी रौनक, मूर्तियों और सजावट की खरीदारी तेज

दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही भागलपुर के बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शनिवार को शहर के मुख्य बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे खरीदारी का माहौल पूरी तरह चरम पर पहुंच गया। लोग अपने घरों और दुकानों को सजाने के लिए लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों, मिट्टी के दीयों, घरौंदों और पूजा सामग्री की जमकर खरीदारी कर रहे हैं।

शहर के वैरायटी चौक, सुजागंज, तिलकामांझी और मिरजानहट जैसे प्रमुख इलाकों में देर रात तक चहल-पहल बनी रही। बाजार में पारंपरिक मिट्टी के दीयों के साथ-साथ बिजली की रंग-बिरंगी लाइटों और डिजाइनर लैंप्स की काफी मांग है। श्रद्धालु पूजा के लिए लाल-पीले कपड़े, रोली, जनेऊ, अगरबत्ती, कपूर, कलश, धूप और कौड़ियों जैसी आवश्यक सामग्री जुटाने में लगे हुए हैं।

बाजार भाव और मूर्तियों की विविधता

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मूर्तियों के विक्रेताओं के अनुसार, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों की कीमत 100 रुपये से लेकर 4,200 रुपये तक है। वहीं, साधारण मिट्टी के दीये 100 से 200 रुपये प्रति सैकड़ा और रंगीन दीये 10 से 25 रुपये प्रति पीस के हिसाब से बिक रहे हैं। चीनी के हाथी-घोड़े 200 से 240 रुपये प्रति किलो और घरौंदों की कीमत 100 से 700 रुपये के बीच है। मूर्ति विक्रेता नवीन कुमार और सूरज कुमार ने बताया कि ये मूर्तियां कोलकाता से मंगाई गई हैं, जिनमें कुबेर, हाथी और परियों वाली अलग-अलग डिजाइन उपलब्ध हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कीमतों में बढ़ोतरी के कारण ग्राहक अब ज्यादा मोलभाव कर रहे हैं।

पूजा के शुभ मुहूर्त को लेकर ज्योतिषी पंडित मनोज कुमार मिश्रा ने तीन विशेष समय बताए हैं। व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कुंभ स्थिर लग्न में दोपहर 1:23 से शाम 4:54 तक पूजा करना शुभ है। घरों के लिए प्रदोष काल शाम 6:00 से 7:56 तक सबसे उत्तम है, जबकि निशिथ काल में रात 12:28 से 2:43 तक पूजा की जा सकती है।

वहीं, शनिवार को छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी भी मनाई गई। परंपरा के अनुसार, लोगों ने दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) की ओर मुख कर दीये जलाए। जगन्नाथ मंदिर के पंडित समीर मिश्रा ने बताया कि गाय के गोबर या मिट्टी के दीयों में सरसों का तेल डालकर जलाना पापों का नाश करता है और अकाल मृत्यु के भय को दूर कर परिवार में सुख-समृद्धि लाता है।

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