भागलपुर में आवारा कुत्तों के खौफ से मुक्त करने और रेबीज मुक्त बनाने के दावों के साथ नगर निगम की योजना धरातल पर दम तोड़ रही है।जयपुर की संतुलन जीव कल्याण संस्था को 1.36 करोड़ रुपये का टेंडर सौंपकर प्रति कुत्ते के बंध्याकरण और टीकाकरण के लिए 1,610 रुपये तय किए गए हैं। अधिकारियों ने रोजाना 50 कुत्तों को पकड़कर नसबंदी का दावा किया था, लेकिन शहर के हर चौराहे पर कुत्ते झुंड में घूम रहे हैं।
भागलपुर के सैंडिस कंपाउंड में रोजाना सैकड़ों लोग टहलने आते हैं, जो अब आवारा कुत्तों का अड्डा बन चुका है।
मुख्य ट्रैक पर सुबह 10 से 15 कुत्तों का झुंड आक्रामक मुद्रा में रहता है। पिछले हफ्ते चार मॉर्निंग वॉकर्स को कुत्तों ने काटकर जख्मी कर दिया। शिकायत पर पहुंची एजेंसी की टीम 50 में से सिर्फ 2 कुत्ते पकड़ पाई और बाकी भाग निकले।
खंजरपुर, आदमपुर, स्टेशन चौक, भीखनपुर चौक और तिलकामाझी जैसे व्यस्तम चौराहों पर स्थिति जस की तस है।
रात होते ही सड़कों पर बाइक और साइकिल सवारों के पीछे कुत्तों का झुंड दौड़ता है, जिससे रोज हादसे हो रहे हैं। जनता पूछ रही है कि प्रति कुत्ते 1,610 रुपये खर्च होने के बाद भी असर क्यों नहीं दिख रहा?
दिखावे की कार्रवाई क्यों हो रही है जब 50 से अधिक कुत्ते मौजूद होने पर केवल 2 ही पकड़े जा रहे हैं। क्या एजेंसी के पास पर्याप्त डॉग-कैचर गाड़ियां और कर्मचारी नहीं हैं? क्या नगर निगम के अधिकारी औचक निरीक्षण कर रहे हैं कि फाइलों में नसबंदी तो नहीं दिखाई जा रही? शहरवासी इस खौफ से तंग आ चुके हैं और असर न दिखने पर आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।