भागलपुर में दुर्गा पूजा अब बड़ा आर्थिक जरिया बन गई है। पिछले पांच साल में इस त्योहार का कुल बजट लगभग दोगुना हो गया है। साल 2020-21 में शहर की पूजा समितियों का कुल बजट करीब 3.5 करोड़ रुपये था, जो साल 2026 में 6 से 7 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। इस खर्च में मूर्ति निर्माण, पंडाल, रोशनी, भोग, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विसर्जन जुलूस शामिल हैं। इसमें नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस और बिजली कंपनी के अलग से होने वाले बुनियादी ढांचे के खर्च शामिल नहीं हैं। त्योहार के दौरान शहर में खुदरा व्यापार तेजी से बढ़ता है, खासकर सड़क किनारे के खान-पान के दुकानदारों और खिलौने बेचने वालों का। एक मेले की यात्रा के दौरान चार सदस्यों वाले औसतन परिवार खाने और खिलौनों पर 500 से 1,000 रुपये के बीच खर्च करते हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लाखों भक्त उत्सव में हिस्सा लेते हैं, जिससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है।
सबर से नाथनगर तक वर्तमान में 100 से अधिक पूजा स्थल सक्रिय हैं। दुर्गा पूजा महासमिति के पास पंजीकृत 58 समितियों में से शीर्ष सात पंडालों का कुल बजट 1.14 करोड़ रुपये है। शेष 51 पंजीकृत समितियों द्वारा लगभग 2.55 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है, जबकि अन्य गैर-पंजीकृत मंदिरों के लिए 3 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का अनुमान है।
विशिष्ट बजट हाइलाइट्स में शामिल हैं: हाउसिंग बोर्ड बरारी (वैष्णो मंदिर) 20 लाख रुपये, दुर्गाबाड़ी (मशकचक) 20 लाख रुपये, बड़ी खंजरपुर 20 लाख रुपये, कालीबाड़ी 17 लाख रुपये, मारवाड़ी पाठशाला 15 लाख रुपये, मुंदीचक गढ़ैया 14 लाख रुपये और कचहरी चौक 8 लाख रुपये। युवक संघ (मारवाड़ी पाठशाला) के सचिव बबन साह ने बताया कि सामग्री और सजावट की बढ़ती लागत के कारण उनका अनुमानित खर्च 15 लाख रुपये से अधिक हो गया है। इसी तरह, दुर्गाबाड़ी पूजा समिति के निरुपम कांतिपाल ने बताया कि सुरक्षा, रोशनी और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को कवर करने के लिए उनकी समिति का बजट लगभग 20 लाख रुपये है। हिंद ए युवा संघ के सचिव अजीत यादव ने पुष्टि की कि बड़ी खंजरपुर दुर्गा मंदिर का बजट 15 लाख रुपये से अधिक है, जबकि हाउसिंग बोर्ड बरारी वैष्णो मंदिर समिति के दीपक दास ने उनके खर्च का अनुमान 20 लाख रुपये लगाया है।