भागलपुर में दुर्गा पूजा का अनोखा रंग, आधुनिक थीम के साथ पुरानी परंपराएं भी जिंदा

MyBhagalpur Team6 October 20262 min read0 viewsCity Local
भागलपुर में दुर्गा पूजा का अनोखा रंग, आधुनिक थीम के साथ पुरानी परंपराएं भी जिंदा

सिलक सिटी भागलपुर में इस बार दुर्गा पूजा का जश्न बहुत बदल गया है। अब पारंपरिक पूजा के साथ-साथ भव्य थीम वाले पंडाल, 3डी कला, आधुनिक लाइट और डिजिटल प्रचार भी देखने को मिल रहे हैं। पूजा का अंदाज भले ही आधुनिक हो गया है, लेकिन पुरानी परंपराएं जैसे मूर्ति विसर्जन, ढाक की थाप, शंख की आवाज और प्राचीन मंदिर पूजा के तरीके पूरी तरह से वैसे ही हैं। आयोजन समिति भक्तों की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रख रही है। इसके लिए सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन से नजर रखी जा रही है। इसके अलावा क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल दान देने का तरीका भी आम हो गया है। युवा आयोजक फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करके त्योहार की भव्यता को दुनिया भर में शेयर कर रहे हैं, जिससे विदेश में रहने वाले भागलपुर के लोग भी इसका आनंद ले पा रहे हैं। इस साल कई मुख्य पंडालों को बहुत खास तरीके से सजाया गया है।

बरारी हाउसिंग बोर्ड का वैष्णवी दरबार

बरारी हाउसिंग बोर्ड में वैष्णवी दरबार समिति ने 70 फीट ऊंचा पंडाल बनाया है। इसमें 3डी मूर्तियों के जरिए भगवान कृष्ण के जीवन की घटनाओं जैसे माखन चोरी और सुदर्शन चक्र धारण करने के दृश्यों को दिखाया गया है। इसे मालदा के कलाकार सादिकुल शेख और उनकी टीम तैयार कर रही है। समिति के सदस्य गजेंद्र सिंह ने बताया कि इन दृश्यों को 3डी कारीगरी के जरिए जीवंत किया जा रहा है।

खलीफाबाग का युवक संघ पंडाल

खलीफाबाग स्थित मारवाड़ी पाठशाला में युवक संघ ओडिशा के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर की नकल कर रहा है। इस काम को कोलकाता के हबू और उनकी कारीगरों की टीम के साथ-साथ कुम्भारटोली के मूर्तिकार मिलकर पूरा कर रहे हैं। युवक संघ के सचिव बबन साह ने बताया कि उन्होंने भव्यता तो बढ़ाई है, लेकिन शास्त्रीय परंपराओं से कोई समझौता नहीं किया है।

कचहरी चौक का महावीर मंदिर पंडाल

कचहरी चौक पर पंडाल को पटना जंक्शन के प्रसिद्ध महावीर मंदिर के रूप में तैयार किया गया है। पूजा समिति के अध्यक्ष कन्हैया वर्मा ने बताया कि पश्चिम बंगाल के मालदा से आए कुशल कारीगर इस ढांचे को पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं। स्थानीय लोगों और आयोजनों से जुड़े लोगों ने इस बदलाव को देखा है। युवा आयोजक दीपक दास ने बताया कि इसकी तैयारी महीनों पहले शुरू हो जाती है और डिजिटल रील्स से शहर के इस उत्सव का माहौल पूरी दुनिया में पहुंच रहा है। बरारी के रहने वाले शंकर सिंह ने बताया कि त्योहार भले ही बदल गए हैं, लेकिन नई व्यवस्थाएं ज्यादा अनुशासित हैं। भीड़ और पूजा के समय की जानकारी सोशल मीडिया पर मिलने से लोगों को काफी आसानी हो रही है।

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