भागलपुर में दुर्गा पूजा के तीन दिनों, अष्टमी से दशमी तक, ऐतिहासिक आर्थिक प्रदर्शन दर्ज किया गया। इस दौरान लगभग 250 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ। यह पिछले साल के 200 करोड़ रुपये के आंकड़े से एक बड़ी वृद्धि है।
- कपड़ा सेक्टर में सबसे ज्यादा करीब 100 करोड़ रुपये की बिक्री हुई।
- मिठाई की दुकानों पर 5 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
- फल, फूल और पूजा सामग्री से 5 करोड़ रुपये की आय हुई।
- खाना, सजावट का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स की बिक्री 10 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
- करीब 200 भव्य पंडालों के निर्माण से 30 करोड़ रुपये का व्यापार हुआ।
इस त्योहारी गतिविधि से लगभग 4,500 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला, जिसमें 2,000 ऐसे लोग शामिल हैं जिन्होंने पहली बार आय के अवसर प्राप्त किए। वाहनों की आवाजाही और जनरेटर के इस्तेमाल से ईंधन की खपत में भी भारी उछाल आया। सामान्य स्तर की तुलना में लगभग 1.5 लाख लीटर पेट्रोल और 2 लाख लीटर डीजल की खपत हुई, जो सामान्य स्तर से 10 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि अगर विक्रमशिला सेतु पूरी तरह चालू होता, तो पड़ोसी जिलों से आने वाले श्रद्धालुओं की वजह से कुल व्यापार में कम से कम 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती थी।
इस आर्थिक उछाल के साथ पर्यावरण संबंधी चुनौतियां भी सामने आईं। भागलपुर नगर निगम क्षेत्र में तीन दिनों के भीतर 780 से 810 मीट्रिक टन कचरा निकला, जो सामान्य स्तर से 60 मीट्रिक टन अधिक है। हवा की गुणवत्ता भी खराब हो गई, जिससे शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 152 तक पहुंच गया, जिसे 'अस्वस्थ' श्रेणी में रखा गया है। कुप्पाघाट में 154, भिखनपुर में 153, और गोसाइगांव तथा तुलसीनगर कॉलोनी में 151-151 एक्यूआई दर्ज किया गया। अधिकारियों ने भविष्य के आर्थिक विकास को पर्यावरण की स्थिरता के साथ संतुलित करने के लिए बेहतर ठोस कचरा प्रबंधन, ट्रैफिक नियंत्रण और प्रदूषण नीतियों की आवश्यकता पर ध्यान दिलाया।