भागलपुर शिक्षा विभाग में 98 लाख रुपये के गबन मामले की जांच में एक बड़ा और हैरान करने वाला खुलासा हुआ है। जिस जिला कार्यक्रम अधिकारी (स्थापना) शशि चंदन चौधरी ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई थी, उन्हीं को इस घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
- विशेष पुलिस टीम ने डीपीओ शशि चंदन चौधरी और संविदा ऑपरेटर अविनाश राज को हिरासत में लिया।
- सिटी डीएसपी हेमंत सिंह ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
- सूत्रों के अनुसार, तकनीकी जांच और विभागीय विश्लेषण से पता चलता है कि डीपीओ की सीधी मंजूरी के बिना गबन के लिए 'मेकर-चेकर' प्रणाली में हेरफेर नहीं किया जा सकता था।
मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) पोर्टल पर 'तनुश्री' नाम से एक फर्जी आईडी बनाई गई थी। इस खाते के माध्यम से, आरोपियों ने सरकारी खजाने से पैसे निकालने के लिए मकान किराया भत्ता (HRA) को 2,000 प्रतिशत तक बढ़ा दिया था। जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि जांच जारी रहने के दौरान कई महत्वपूर्ण विभागीय फाइलें गायब हो गई हैं।
शुरुआती एफआईआर में संविदा ऑपरेटर अविनाश राज, उनकी पत्नी काजल और फाइल इंचार्ज शिशिर झा के नाम शामिल थे।
यह घोटाला सबसे पहले 8 अक्टूबर 2026 को सामने आया जब डीपीओ चौधरी कथित तौर पर पेरोल फाइलों, सर्विस बुकों और बजट आवंटन की समीक्षा कर रहे थे। जांच में पता चला कि अविनाश राज ने फर्जी आईडी बनाने के लिए अपने सिस्टम एक्सेस का गलत इस्तेमाल किया था। रिकॉर्ड बताते हैं कि फर्जी 'तनुश्री' पहचान का उपयोग करके मई 2025 और जुलाई 2026 के बीच लगभग 52 लाख रुपये निकाले गए थे।
बैंकों द्वारा संदिग्ध लेनदेन को चिह्नित करने और खातों पर रोक लगाने के बाद, अगस्त 2026 में 46 लाख रुपये का गबन करने के और प्रयास तथा 73 लाख रुपये से जुड़े एक अन्य प्रयास को विफल कर दिया गया था। जांच के बाद पुलिस ने अविनाश राज को बांका जिले के शंभूगंज से पकड़ लिया।