भागलपुर के किसान भिंडी की खेती से कर रहे तगड़ी कमाई

खेती में बढ़ती लागत से परेशान भागलपुर के किसान अब बाजार की मांग के अनुसार सब्जियां, फल और फूल जैसी नकदी फसलें उगा रहे हैं। इन फसलों से तुरंत पैसे मिलते हैं और इनकी बिक्री सीधे खेत से ही हो जाती है। भागलपुर के किसान सुजीत पाल ने भिंडी की खेती में बहुत मुनाफा होने की बात कही है और स्थानीय मिट्टी के हिसाब से अधिक पैदावार देने वाली और रोग प्रतिरोधी किस्मों के चयन पर जोर दिया है। पाल जी भागलपुर क्षेत्र के लिए साया जी शंकर, एडवांटा राधिका और अर्का अनामिका जैसी खास भिंडी की किस्में लगाने की सलाह देते हैं। हालांकि ये किस्में अच्छी चलती हैं, लेकिन इनमें पीले शिरा मोज़ेक वायरस का खतरा रहता है जिसे स्थानीय भाषा में 'भंगरी' कहा जाता है। इस बीमारी से पत्तियां पीली पड़कर सूख जाती हैं, पौधे का बढ़ना रुक जाता है, फल टेढ़े-मेढ़े हो जाते हैं और कुल पैदावार में भारी कमी आती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि लक्षण दिखते ही फसल को पूरी तरह बर्बाद होने से बचाने के लिए तुरंत इलाज करना जरूरी है। जैविक खेती के लिए विशेषज्ञ संक्रमण से निपटने के लिए नीम का तेल छिड़कने की सलाह देते हैं। इसके अलावा, खेतों में पीले और नीले रंग के चिपचिपे ट्रैप लगाने से कीट पकड़ में आते हैं और बीमारी फैलाने वाले कीड़ों को रोककर वायरस के फैलाव को थामा जा सकता है।