भागलपुर में BIADA और जाह्नवी घाट के बीच 1 अक्टूबर से चल रही नाव सेवाओं में भारी लापरवाही सामने आ रही है। सुरक्षा को ताक पर रखकर ऑपरेटर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं और तय समय पर नाव नहीं चला रहे हैं। - तय समय के बजाय नाव पूरी तरह यात्रियों से भरने के बाद ही रवाना हो रही हैं। - घाटों पर बने कंट्रोल रूम और आपदा मित्र नावों के छूटने का समय और यात्रियों की गिनती नहीं कर रहे हैं। - प्रशासन अभी भी पक्की गिनती के बजाय यात्रियों की रोज की सिर्फ अंदाजन संख्या पर निर्भर है। - ऑपरेटरों को हर यात्री के हिसाब से 30 रुपये मिलते हैं और वे नियम तोड़ने में लगे हैं।
नियम के मुताबिक जाह्नवी घाट से सुबह 5:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक हर घंटे नाव चलनी चाहिए। BIADA घाट से सुबह 6:00 बजे से शाम 4:30 बजे तक का समय तय है।
रोजाना 12 फेरे लगाने का नियम है, लेकिन ऑपरेटर इन सभी तय समय को छोड़कर अपनी मर्जी चला रहे हैं। शनिवार को जेटी-2 से दोपहर 1:00 बजे जाने वाली नाव तय समय पर नहीं गई।
यह नाव क्षमता पूरी होने के बाद दोपहर 1:30 बजे रवाना हुई। जेटी नंबर 1 के पास कंट्रोल रूम और मौके पर आपदा मित्र तैनात किए गए हैं। इसके बाद भी ये लोग नावों के छूटने के समय पर नजर नहीं रख रहे हैं और न ही यात्रियों की संख्या नोट कर रहे हैं।
प्रशासन के अधिकारी सही गिनती करने के बजाय सिर्फ रोज के अनुमानित आंकड़ों पर भरोसा कर रहे हैं। इन नाव सेवाओं की देखरेख मिथिलेश कुमार सिंह, गौरी नारायण जन उत्थान प्राइवेट लिमिटेड और जिरिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियां कर रही हैं। इन ऑपरेटरों को ले जाए जाने वाले यात्रियों की संख्या के आधार पर भुगतान मिलता है।
प्रति यात्री 30 रुपये की तय दर से भुगतान किया जाता है। मिथिलेश कुमार सिंह के कर्मचारियों को तय समय सारणी का पालन करने के बजाय मोटरसाइकिल के टोकन बांटने पर ज्यादा ध्यान देते हुए देखा गया है।
जब इस बारे में जवाब मांगा गया कि यात्रियों की गिनती क्यों नहीं हो रही है और जिम्मेदारी क्यों नहीं तय की जा रही है, तो
एडीएम आपदा कुंदन कुमार ने बताया कि यात्रियों को गिनने की जिम्मेदारी नाजारत शाखा की है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के फेल होने के कारणों का जवाब उसी विभाग को देना होगा।