दर्दनाक! भागलपुर बाढ़ में एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत

बिहार के भागलपुर में बाढ़ का संकट बहुत बढ़ गया है। यहाँ के बायपास थाना क्षेत्र के कोयली खुटहा गाँव में बाढ़ के पानी में डूबने से एक ही परिवार के पाँच सदस्यों की मौत हो गई है। मरने वालों में तीन महिलाएँ भी शामिल हैं। यह दर्दनाक हादसा 10 सितंबर 2026 को हुआ जब परिवार यात्रा कर रहा था और बाढ़ के पानी से भरी सड़क पर आ गया। एक बच्चे के गहरे पानी में पैर रखने और उसे बचाने की कोशिश में परिवार के लोग तेज बहाव में बह गए। चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पाँचवें व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है। प्रभावित समूह में से तीन को एक अस्थायी सुविधा में रखा गया, जबकि एक को तुरंत इलाज के लिए मायागंज अस्पताल ले जाया गया।
बिहार में बाढ़ का प्रकोप
यह घटना बिहार में चल रही एक बड़ी आपदा का हिस्सा है, जहाँ 14 जिलों में बाढ़ से 43 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, राज्य के अंदर और नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण कई नदियाँ खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए अधिकारी 1,932 नावों का संचालन कर रहे हैं और 6,692 क्विंटल पशु चारा बांटा गया है। इस संकट से निपटने के लिए मुख्यमंत्री 15 सितंबर को भागलपुर में प्रभावित परिवारों के बैंक खातों में सीधे वित्तीय सहायता ट्रांसफर करने वाले हैं, जिसमें 92 पंचायतों के 147,000 से अधिक परिवार शामिल हैं।
राहत और बचाव कार्य
स्थानीय अधिकारी सक्रिय रूप से बचाव अभियान चला रहे हैं, जिसमें ऐसे मामले भी शामिल हैं जहाँ अधिकारियों ने फंसे हुए लोगों तक पहुँचने के लिए ट्रैक्टर से बाढ़ के पानी को पार किया। नाथनगर में पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान जैसे अस्थायी राहत शिविर बनाए गए हैं, जहाँ बच्चों की शिक्षा और मनोरंजन की व्यवस्था की गई है।
अन्य हादसे और मौतें
हाल के दिनों में भागलपुर क्षेत्र में बाढ़ से जुड़ी कई अन्य मौतें भी हुई हैं: 9 सितंबर 2026 को पीरपैंती के एकचरी दियारा में पाँच साल के रूपेश कुमार की डूबने से मौत हो गई, जबकि 16 साल के रोहित की चापाकल छूते समय करंट लगने से मौत हो गई। 8 सितंबर 2026 को दौलतपूर गाँव में एक वार्ड सदस्य के 13 वर्षीय बेटे रौनक राय की डूबने से मौत हो गई। इसके अलावा, 10 सितंबर 2026 को पूर्व विधायक गोपाल मंडल के भतीजे 18 वर्षीय शुभम कुमार की विसर्जन अनुष्ठान के दौरान गहरे पानी में डूबने से मौत हो गई। गंगा और उसकी सहायक नदियों के बढ़ने के कारण जिले में 5,000 से अधिक परिवारों को तटबंधों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है।