भागलपुर में गंगा नदी के उफान और बाढ़ के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के हालात बहुत खराब हो चुके हैं। इस आपदा का सबसे बड़ा असर पशुपालन क्षेत्र पर पड़ा है, जिससे किसानों और मवेशी पालकों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। बाढ़ के कारण मवेशियों के लिए चारे की भारी किल्लत हो गई है और दूध का उत्पादन भी आधा रह गया है।
- गंगा के उफान से दियारा और तटीय इलाकों के सैकड़ों एकड़ में लगी हरी फसलें और चारागाह पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।
- मवेशियों के लिए हरा व सूखा चारा मिलना पूरी तरह बंद हो गया है, जिससे किसान ऊंचे स्थानों और बांधों पर तिरपाल के नीचे रहने को विवश हैं।
- पशुपालन विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक चारे की कमी से दुग्ध उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।
भागलपुर के ग्रामीण और सुदूर क्षेत्रों में आई बाढ़ का सबसे घातक प्रहार ज़िले के पशुपालन क्षेत्र पर पड़ा है।
दियारा और तटीय इलाकों के सैकड़ों एकड़ में लगी हरी फसलें और चारागाह पूरी तरह से जलमग्न हो चुके हैं, जिससे मवेशियों के लिए हरा व सूखा चारा मिलना पूरी तरह बंद हो गया है। स्थिति यह है कि किसान ऊंचे स्थानों और बांधों पर अपने मवेशियों को लेकर भूखे पेट तिरपाल के नीचे रहने को विवश हैं।
पशुपालन विभाग की प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार, चारे की इस भीषण कमी और भुखमरी की वजह से दुग्ध उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है।स्थानीय विमुल डेयरी संचालकों और सुधा काउंटरों के वितरकों ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाला दैनिक दूध संकलन आधा रह गया है।
शहर में अचानक पैदा हुई दूध की इस भारी किल्लत को संतुलित करने और आम उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने के लिए अब प्लांटों में इमरजेंसी के लिए भंडारित किए गए मिल्क पाउडर का बड़े पैमाने पर सहारा लिया जा रहा है।