भागलपुर में बाढ़ से महंगाई का झटका, सब्जियों के दाम आसमान पर

MyBhagalpur Team6 September 20262 min read29 viewsCity Local
भागलपुर में बाढ़ से महंगाई का झटका, सब्जियों के दाम आसमान पर

भागलपुर, 06 सितंबर। जिले में गंगा और कोसी नदियों के उफान के कारण बाढ़ का संकट अब केवल खेतों और ग्रामीण इलाकों तक सीमित नहीं रह गया है। बाढ़ का सीधा और तीखा असर अब आम लोगों की थाली और घरेलू बजट पर दिखने लगा है।

  • दियारा क्षेत्र में बाढ़ से हरी सब्जियों की खड़ी फसल बर्बाद
  • स्थानीय मंडियों में हरी सब्जियों की आवक न के बराबर
  • परिवहन लागत बढ़ने से कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची

दियारा क्षेत्र में फसल बर्बाद

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दियारा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बाढ़ का पानी घुसने से हरी सब्जियों की खड़ी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे स्थानीय मंडियों में हरी सब्जियों की आवक न के बराबर रह गई है। सब्जी मंडी के कारोबारियों के मुताबिक, भागलपुर शहर और आसपास के बाजारों में अधिकांश हरी सब्जियां दियारा इलाकों से आती थीं। लेकिन खेतों के जलमग्न होने के कारण लोकल सप्लाई पूरी तरह ठप हो गई है। मांग को पूरा करने के लिए अब व्यापारियों को बाहरी जिलों और राज्यों से सब्जियां मंगानी पड़ रही हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ गई है और कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।

बजट पर पड़ी महंगाई की मार

स्थानीय सब्जी मंडियों में लौकी, परवल, भिंडी, खीरा और कद्दू जैसी रोजमर्रा की सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आया है। बाढ़ से पहले जो सब्जियां सामान्य दामों पर मिल रही थीं, उनकी कीमतें अब दोगुनी या उससे भी अधिक हो गई हैं। इससे मध्यम और गरीब परिवारों का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है। बाजार में खरीदारी करने आए आम उपभोक्ताओं का कहना है कि महंगाई के कारण अब हरी सब्जियां खरीदना जेब पर भारी पड़ रहा है। लोग अब हरी सब्जियों के बजाय आलू-सोयाबीन जैसी चीजों से काम चलाने को मजबूर हैं। मंडियों के थोक और खुदरा विक्रेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक दियारा क्षेत्र से पानी पूरी तरह नहीं निकल जाता और दोबारा बुवाई शुरू नहीं होती, तब तक आम जनता को महंगी सब्जियों से राहत मिलने की उम्मीद बेहद कम है।

मंडियों में लोकल आवक शून्य

भागलपुर की विभिन्न मंडियों जैसे मंदरोजा, तिलकामांझी और मिरजानहाट में बाढ़ के बाद सब्जियों की कीमतों में भारी उछाल आया है। स्थानीय दुकानदारों और आढ़तियों के अनुसार, बाढ़ से पहले और बाढ़ के बाद की कीमतों में दोगुने तक का अंतर आ चुका है। कीमतें बढ़ने का मुख्य कारण स्थानीय दियारा क्षेत्रों एवं जिच्छो-सरधो, सरधो, धनकर और लोदीपुर में करीब 2000 हेक्टेयर में लगी हरी सब्जियों की फसल पूरी तरह डूब कर बर्बाद हो चुकी है। इस कारण मंडियों में लोकल आवक लगभग शून्य हो गई है। अब रांची, सिलीगुड़ी और अन्य बाहरी इलाकों से गाड़ियां मंगानी पड़ रही हैं, जिससे अतिरिक्त ट्रांसपोर्ट भाड़ा जुड़ने के कारण खुदरा बाजार में आम उपभोक्ताओं को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

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