बाढ़ से घिरे दियारा के लोग अपनों के संग सच्चिदानंद नगर में ले रहे शरण

गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने से दियारा इलाके में भारी तबाही मची है और बाढ़ पीड़ित लोग सरकारी राहत कैंपों की बजाय शहर में अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं। एयरपोर्ट के पीछे स्थित सच्चिदानंद नगर कॉलोनी इस संकट की घड़ी में इन विस्थापित लोगों के लिए मुख्य ठिकाना बन गई है। नगर निगम के वार्ड नंबर 31 के तहत आने वाले सच्चिदानंद नगर को दशकों पहले उन लोगों ने बसाया था जो खुद कभी बाढ़ की त्रासदी झेल चुके थे। इस इलाके में कभी झोपड़ियां और कच्चे मकान हुआ करते थे, लेकिन अब यहां पक्के और बहुमंजिला मकान बन चुके हैं। जीवन स्तर में सुधार के बावजूद यहां के लोग विस्थापितों की मदद के लिए एक मजबूत समुदाय की भावना बनाए रखते हैं। गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण संकट का सामना कर रहे शंकरपुर दियारा और आसपास के इलाकों के दर्जनों परिवारों ने सीधे सच्चिदानंद नगर में अपने रिश्तेदारों के घरों में शरण ली है। रणजीत कुमार, रामप्रवेश कुमार, कुली मंडल, सुबोध मंडल, तूफानी मंडल, सदन मंडल, असानी मंडल और बलराम मंडल जैसे लोगों ने बताया कि सरकारी राहत कैंपों में अक्सर बहुत भीड़ होती है, जिससे खाने, साफ-सफाई और मवेशियों की देखभाल में मुश्किलें आती हैं। इस आपदा के बावजूद विस्थापित लोग आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दे रहे हैं। कई लोग अपने दुधारू मवेशियों को कॉलोनी में ले आए हैं और अपने परिवार व जानवरों का खर्च चलाने के लिए दूध बेचकर आजीविका कमा रहे हैं। अन्य लोग अपने खर्च पूरे करने के लिए हर सुबह शहर की सड़कों पर दैनिक मजदूरी की तलाश करते हैं। ये निवासी पानी का स्तर कम होने और संकट समाप्त होने के बाद अपने गांवों में लौटने का इरादा रखते हैं, जो समुदाय के लचीलेपन और आपात स्थिति के दौरान आपसी रिश्तों की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करता है।