भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों का दर्द, एक महीने से पानी में डूबे हैं घर

MyBhagalpur Team21 September 20262 min read4 viewsCity Local
भागलपुर में बाढ़ पीड़ितों का दर्द, एक महीने से पानी में डूबे हैं घर

भागलपुर में भीषण बाढ़ के कारण सैकड़ों विस्थापित परिवार पिछले एक महीने से राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय परिसर के तिला कोठी में रहने वाले 25 साल के राज किशोर जैसे लोगों ने अपने कागजात, नकदी और आभूषण खो दिए हैं। हैदराबाद से लौटे राज किशोर ने बताया कि दीदारपुर बिंद टोला स्थित उनका घर डूबा हुआ है और ड्रमों में रखा अनाज भी पानी में है। काले प्लास्टिक, पुरानी साड़ियों और रंग-कपड़ों से बने इन अस्थायी शिविरों में वे परिवार रह रहे हैं जिन्होंने अपना अधिकांश सामान खो दिया है। टीएनबी कॉलेजिएट ग्राउंड राहत शिविर में भी ऐसे ही हालात हैं, जहां दीदारपुर, शंकरपुर और बरारीरिया के डूबे हुए इलाकों के करीब 650 लोगों को खाना दिया जा रहा है। शिक्षक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि इस शिविर में करीब 400 मवेशी भी हैं और उनके लिए चारे व पशु चिकित्सा का अलग इंतजाम है। पंजाब और तेलंगाना से लौटे सुमन कुमार, करण कुमार और रवि कुमार जैसे कई प्रवासी मजदूर आपदा की खबर सुनकर बिना रुका हुआ वेतन मिले ही लौट आए। सुमन कुमार ने बताया कि लुधियाना और Bhagalpur के बीच हफ्ते में सिर्फ एक ट्रेन चलने से आना-जाना बहुत मुश्किल था।

राहत शिविरों में जीवन और समस्याएं

परिवारों के लिए जीना मुश्किल हो रहा है और उषा देवी ने चिंता जताई कि नवंबर में छठ पर्व तक लोग कैसे गुजारा करेंगे क्योंकि घर अभी भी कीचड़ और सिल्ट से भरे हैं। 52 साल के सूर्यनारायण मंडल ने बताया कि उनके परिवार ने लगभग सारी संपत्ति खो दी है और फसलों व घरेलू जरूरतों के लिए स्वयं सहायता समूहों से लिए गए 70,000 से 80,000 रुपये के कर्ज का बोझ उन पर है। मंडल ने हर साल आने वाली तबाही से बचने के लिए लोगों को ऊंची जमीन पर बसाने की सरकारी मांग की है।

प्रशासन की ओर से मदद

जिला प्रशासन ने राहत कार्यों की निगरानी के लिए रविंद्र भवन में एक कंट्रोल रूम बनाया है, जहां 250 परिवारों को दिन में दो बार खाना दिया जा रहा है। विस्थापित बच्चों की मदद के लिए कला एवं संस्कृति अधिकारी अंकित रंजन के नेतृत्व में मंजूषा कला थेरेपी, कहानी कहने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रोज सेशन चलाए जा रहे हैं। राहत काम चल रहे हैं, लेकिन शिविर बंद होने के बाद लोगों के भविष्य पर अनिश्चितता बनी हुई है।

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