भागलपुर के तटीय इलाकों में गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर और नालों का गंदा पानी घरों में घुसने से लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। पिछले चार दिनों से हालात बहुत खराब हैं और इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
- आदampur घाट, बैंक कॉलोनी, मानिक सरकार घाट, गोलाघाट, दीपनगर और किलाघाट जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं।
- दीपनगर में झुग्गी झोपड़ी समेत 200 घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है।
- साहेबगंज इलाके में बिंद टोली, मोहनपुर, सकम, रामटोलपुर, लालुचक और नील कोठी समेत 500 से अधिक घरों में पानी भर गया है।
- धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थल भी पानी की चपेट में आ गए हैं।
गंगा नदी का पानी और नालों का गंदा पानी मिलने से आवासीय इलाकों में स्थिति बहुत गंभीर हो गई है। आदमपुर घाट, बैंक कॉलोनी, मानिक सरकार घाट, गोलाघाट, दीपनगर और किलाघाट के लोग पिछले चार दिनों से इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं। पानी के साथ आने वाली बदबू, मच्छरों का हमला और जहरीले जीवों के डर से किराएदार घर खाली करके जा रहे हैं, जबकि मकान मालिक अपने रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे हैं।
दीपनगर में झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों समेत 200 घरों में पानी भर गया है। DYFI नेता मनोज गुप्ता ने प्रशासन से तुरंत राहत देने की मांग की है।
बैंक कॉलोनी के निवासी सूरज प्रभात दुबे ने बताया कि लगभग सभी घरों के ग्राउंड फ्लोर में पानी घुस गया है। यहां घुटने तक पानी और कीचड़ की वजह से सड़कें बहुत चिकनी और खतरनाक हो गई हैं, जिससे दोपहिया चालकों को आने-जाने में भारी दिक्कत हो रही है। लोगों का कहना है कि जहरीले सांप और गोह घरों में घुस रहे हैं, जिसकी वजह से परिवारों को रातभर जागकर पहरा देना पड़ रहा है।
पोश इलाके मानिक सरकार में मल्टी-स्टोरी अपार्टमेंट के बेसमेंट में तेजी से पानी भर रहा है। इससे लोगों को अपनी महंगी गाड़ियां सुरक्षित जगह पर ले जाने के लिए काफी भागदौड़ करनी पड़ी। सखीचंद घाट के रहने वाले आनंद मिश्रा और दीपनगर के राज कुमार ने गंदे और रुके हुए पानी की वजह से बीमारी फैलने की आशंका जताई है, जिससे कई लोग अपने घरों में ही कैद होकर रह गए हैं।
साहेबगंज इलाके में आरजेडी नेता तिरुपति नाथ यादव ने बताया कि बिंद टोली, मोहनपुर, सकम, रामटोलपुर, लालुचक और नील कोठी समेत 500 से अधिक घरों में पानी घुस गया है। स्थानीय निवासी रमन कुमार ने बताया कि इस बाढ़ की वजह से खाना बनाने में परेशानी आ रही है और मवेशियों के चारे की भारी कमी हो गई है।
नील कोठी इलाके में आने-जाने वाले रास्ते पूरी तरह डूब चुके हैं, जिससे शहर के बाकी हिस्सों से संपर्क कट गया है।बढ़ते जलस्तर की वजह से धार्मिक और सार्वजनिक जगहों पर भी असर पड़ा है।
सखीचंद घाट पुल के ऊपर से गंगा नदी की तेज धारा बह रही है। ऐतिहासिक बूढ़ानाथ मंदिर जाने वाली मुख्य मुख्य सड़क पर पानी भरा हुआ है। इसके अलावा मशान काली परिसर और इसके पास का पार्क पूरी तरह डूब चुका है और अब एक तालाब जैसा दिखाई दे रहा है।