भागलपुर के कहुआ के रहने वाले अनिल शर्मा ने सीनियर रेलवे इंजीनियर की नौकरी के बाद डेरी फार्मिंग में शानदार सफलता हासिल की है। शर्मा ने साल 2017 में घर के उपयोग के लिए एक गाय से इस काम की शुरुआत की थी और अब उनके पास 40 गायों का झुंड है। साल 2022 में रेलवे से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्यान इस फार्म को चलाने में लगाया, जिससे अब हर दिन 150 लीटर दूध का उत्पादन होता है।
भागलपुर क्षेत्र में डेरी सेक्टर के विकास के बीच अनिल शर्मा की यह कहानी सामने आई है। जहां शर्मा जैसे व्यक्तिगत किसान अपने काम को बढ़ा रहे हैं, वहीं हाल ही में आई बाढ़ के कारण स्थानीय उद्योग को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ की वजह से हरे चारे की कमी हो गई है और विभिन्न फार्मों में दूध के उत्पादन में 30 से 50 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई है। बाजार की मांग को पूरा करने के लिए अब कई ऑपरेटर सूखे दूध के पाउडर का इस्तेमाल कर रहे हैं।
क्षेत्रीय डेरी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए, बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में भागलपुर के विक्रमशिला दुग्ध संघ को आधुनिक बनाने के लिए 6.84 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है। इस निवेश का उद्देश्य प्लांट के उपकरणों को अपग्रेड करना और काम करने की क्षमता में सुधार करना है। इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और प्रजनन के परिणामों में सुधार के लिए जिला एक AI सेंटर और 500 जानवरों की क्षमता वाला हेइफर स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। बेहतर ट्रेनिंग और आधुनिक पशुपालन तकनीकों से समर्थित ये विकास कार्य, किसानों को वर्तमान पर्यावरणीय और कामकाज की चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए हैं।