सावधान! सुल्तानगंज फोर-लेन के पास खुले गड्ढे ले रहे बच्चों की जान, जानिए कैसे

भागलपुर में मुंगेर-मिर्ज़ाचौकी चार-लेन सड़क के निर्माण के लिए घोरघाट से किशनपुर पंचायत तक 26 किलोमीटर के दायरे में 15 बड़े और पानी से भरे गड्ढे छोड़ दिए गए हैं। ये गड्ढे, जिनमें से कुछ की गहराई 20 से 30 फीट तक है, निर्माण एजेंसी द्वारा मिट्टी निकालने के बाद बनाए गए थे, लेकिन इन्हें बिना किसी चेतावनी संकेत या सुरक्षा बैरिकेड के खुला छोड़ दिया गया है।
- भीड़खुर्द पंचायत के मुखिया चंदन कुमार ने बताया कि सोमवार को इन गड्ढों में छह बच्चों की डूबने से मौत हो गई।
- स्थानीय किसानों को इन खतरों की जानकारी है, लेकिन बच्चे अभी भी असुरक्षित हैं।
- कमरगंज के दुर्गा मंदिर के पास गंगा घाट पर भी ऐसा ही खतरा है, जहां मुखिया भारत कुमार ने पिछले पांच वर्षों में सात डूबने से मौत की सूचना दी।
- गोपालपुर प्रखंड में इस्माइलपुर-बिंदटोली तटबंध के स्पर संख्या 5 और 6, टेंटंगा करारी जहाज घाट और दर्शनीय घाट खतरनाक बने हुए हैं।
- अधिकारियों ने बाढ़ के मौसम के बाद इन क्षेत्रों से आपदा मित्रों को हटा दिया है, जिससे कोई सुरक्षा ढांचा नहीं बचा है।
विभिन्न क्षेत्रों में सुरक्षा का अभाव
सबौर प्रखंड में बाबूपुर, रजनदीपुर और मामलखा में भी बाढ़ से प्रभावित गड्ढों के पास चेतावनी बोर्ड नहीं हैं। पीरपैंती में काली प्रसाद, पशुरम्पुर, अथानिया, पीरपैंती बाजार, बाबूपुर बैरिया, एकचरी, बखरपुर और मोहनपुर दियारा घाट जैसे क्षेत्रों में कोई सुरक्षा उपाय, बैरिकेड या तैनात आपदा स्वयंसेवक नहीं हैं।
गोराडीह में भी हादसे
गोराडीह में कोयली खुटुआ गांव के पास एक गड्ढे में हाल ही में पांच लोगों की मौत हो गई, और मोहनपुर तथा रायपुर में भी अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। इन मौतों के बावजूद, प्रखंड में आपदा स्वयंसेवक अनुपस्थित बताए जा रहे हैं। सीओ चंद्रशेखर कुमार ने कहा कि आपदा मित्र जागरूकता अभियान चला रहे हैं और जल स्तर कम होने के बाद ही बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाएगी।