गंगा में नाव चलाने की अनुमति मांगने डीएम कार्यालय पहुंचे नाविक, प्रशासन ने सुरक्षा नियमों पर दी सफाई
विक्रमशिला सेतु पर भीड़ बढ़ने के बाद भागलपुर के नाविकों ने डीएम से नाव चलाने की अनुमति मांगी, प्रशासन ने सुरक्षा नियमों पर दिया जोर।

विक्रमशिला सेतु पर आवागमन में दिक्कतें आने की वजह से इन दिनों गंगा नदी पार करने वाले यात्रियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए शनिवार को स्थानीय नाविकों का एक समूह जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा। नाविकों की मांग है कि उन्हें नियमित रूप से नाव चलाने की अनुमति दी जाए, ताकि वे अपनी आजीविका कमा सकें और यात्रियों को भी आने-जाने में आसानी हो।
नाविकों का कहना है कि सेतु पर चल रहे निर्माण कार्य के कारण लोग नदी का रास्ता अपना रहे हैं, जिससे घाटों पर भारी भीड़ जमा हो रही है। उनका तर्क है कि अगर प्रशासन उनकी नावों का भौतिक सत्यापन कर ले और सुरक्षा मानकों की जांच के बाद अनुमति दे दे, तो इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और यात्रियों का दबाव भी कम होगा।
सुरक्षा मानकों पर प्रशासन का सख्त रुख
नाविकों की इस मांग के बीच भागलपुर जिला प्रशासन ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल किसी भी नई निजी नाव के परिचालन के लिए कोई नया आदेश या अनुमति जारी नहीं की गई है। यात्रियों की जान जोखिम में न पड़े, इसलिए केवल उन्हीं पंजीकृत और मानक पूरे करने वाले बड़े जहाजों (फेरी सेवा) को प्राथमिकता दी जा रही है जो निर्धारित रूटों पर चलते हैं।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि बिना रजिस्ट्रेशन या बिना अनुमति के गंगा में नाव उतारने वालों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पहले भी नियम तोड़ने वालों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा चुकी है। सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं:
- बियाडा घाट के प्लेटफॉर्म को 50 मीटर तक बढ़ाया गया है ताकि यात्री आसानी से चढ़-उतर सकें।
- घाट पर अस्थाई थाना और मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है।
- शाम 5:30 बजे के बाद नदी में किसी भी तरह के परिचालन पर पूरी तरह रोक है।
- ओवरलोडिंग को रोकने और लाइफ जैकेट व चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
कुल मिलाकर, जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह सुरक्षा ऑडिट और मानकों के अनुपालन को ही सबसे ऊपर रखेगा और बिना जांच के किसी भी नाव को अनुमति नहीं मिलेगी।