भागलपुर जिले के गोपालपुर ब्लॉक के अंतर्गत राघोपुर में गंगा नदी का जलस्तर घट रहा है, लेकिन इससे कटाव का संकट और बढ़ गया है। 250 मीटर लंबा जमींदारी बांध नदी में समा जाने के बाद अब तेज धारा सीधे बचे हुए बांध और उसके ठीक पीछे मौजूद अहम रेलवे लाइन को खतरा पहुंचा रही है। रेल मार्ग पर मंडराते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने पटरियों के पास बने सभी घरों और दुकानों को तुरंत खाली कराने का आदेश दिया है। जल संसाधन विभाग ने रेलवे लाइन को सुरक्षित करने के लिए मुख्यालय से दो रिटायर्ड विशेषज्ञ इंजीनियरों को मैदान में उतारा है। रिटायर्ड मुख्य इंजीनियर ई. सहजानंद सिंह और ई. प्रकाश कुमार ने आधुनिक मशीनों की मदद से तकनीकी जांच की, जिसमें गंभीर खतरे सामने आए। जांच में कटाव बिंदु के पास 5 से 16 मीटर तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके अलावा पानी के बहाव की गति इतनी तेज है कि downstream क्षेत्र में पूरी गहराई मापना अभी भी तकनीकी रूप से चुनौती बना हुआ है।
नदी के बहाव का रुख मोड़ने और रेल ढांचे को बचाने के लिए अधिकारी हाई-टेक तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ई. प्रकाश कुमार ने बताया कि गाद जमा होने और मुख्य धारा के रास्ते का नक्शा तैयार करने के लिए गूगल सैटेलाइट इमेजिंग का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस डेटा के आधार पर, गंगा के बहाव को बांध और रेलवे लाइन से दूर हटाने के लिए ड्रेजिंग का काम किया जाएगा। इसके अलावा कटाव की रफ्तार को धीमा करने के लिए तट पर बड़े पैमाने पर एनसी क्रैटिंग यानी पत्थरों से भरी तार की जाली और मेगा जियो-बैग लगाए जा रहे हैं।
पिछले दो दिनों से एक नाव दुर्घटना की वजह से बचाव कार्य में रुकावट आई थी, लेकिन अब कई बड़े ठेकेदारों और अतिरिक्त संसाधनों को तैनात करके काम तेज कर दिया गया है। मौके पर कैंप कर रहे इंजीनियर-इन-Chief ई. वरुण कुमार ने माना कि पहले हुई mismanagement से शुरुआती काम में रुकावट आई थी, लेकिन अब रेलवे लाइन की सुरक्षा करना विभाग की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। अधिकारियों ने बताया कि अगर नदी की धारा रेलवे ट्रैक को तोड़ देती है, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है। 250 मीटर बांध ढहने के बाद जमीन की एक पतली पट्टी ही बची है, ऐसे में यह अभियान पूर्वी बिहार के रेल नेटवर्क को बचाने की एक अहम कोशिश बन गया है।