गंगा के बढ़ते पानी से दियारा के गांवों का टूटा संपर्क, सत्तू खाकर जी रहे बाढ़ पीड़ित

MyBhagalpur Team30 August 20262 min read36 viewsSad/Bad
गंगा के बढ़ते पानी से दियारा के गांवों का टूटा संपर्क, सत्तू खाकर जी रहे बाढ़ पीड़ित

भागलपुर में गंगा नदी का पानी बढ़ने से निचले और दियारा इलाकों में तबाही मच गई है। बाढ़ के पानी ने दर्जनों गांवों को घेर लिया है जिससे लोगों की मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं।

  • शंकरपुर और दिलदारपुर दियारा समेत कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूटा
  • घरों में पानी घुसने से ग्रामीण परिवार, मवेशी और सामान लेकर सुरक्षित जगह जा रहे हैं
  • बाढ़ पीड़ितों के सामने रहने और खाने का बहुत बड़ा संकट खड़ा हो गया है
  • जलावन न मिलने से कई घरों में चूल्हा नहीं जला, लोग सत्तू खाकर दिन गुजार रहे हैं

गांवों का शहर से संपर्क कटा

भागलपुर में गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने निचले और दियारा इलाकों में तबाही मचानी शुरू कर दी है। बाढ़ के पानी ने दर्जनों गांवों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे स्थानीय निवासियों की मुश्किलें चरम पर पहुंच गई हैं। स्थिति यह है कि शंकरपुर और दिलदारपुर दियारा समेत कई गांवों का जिला मुख्यालय से पूरी तरह संपर्क टूट चुका है
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खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर लोग

बाढ़ का पानी घरों में घुसने के बाद ग्रामीण अपने परिवार, मवेशियों और जरूरी सामान के साथ सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रभावित लोग ऊंचे स्थानों, सड़कों के किनारे और बांधों पर शरण लेने को मजबूर हैं। दर्जनों परिवार खुले आसमान के नीचे प्लास्टिक तानकर किसी तरह रात गुजार रहे हैं। बाढ़ ने विस्थापितों के सामने रहने के साथ-साथ भोजन का भी बड़ा संकट खड़ा कर दिया है।

सत्तू खाकर दिन बिता रहे पीड़ित

पीड़ितों ने बताया कि वे चौबीस घंटे में सिर्फ एक बार खाना बना पा रहे हैं और उसी से दोनों वक्त का गुजारा कर रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या जलावन की है। हर तरफ पानी भर जाने के कारण सूखा जलावन मिलना मुश्किल हो गया है। जलावन के अभाव में कई घरों में चूल्हा तक नहीं जल सका है, जिसके कारण लोग सत्तू और सूखा राशन खाकर दिन काटने को मजबूर हैं

ग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा

ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति गहरा आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। पीड़ितों का कहना है कि हर साल उन्हें इस भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ता है। हर वर्ष घर-बार छोड़कर भागना पड़ता है, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। चुनाव के समय किए गए वादे बाढ़ के पानी में बह जाते हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों की नजरें अब सरकार और जिला प्रशासन की राहत पर टिकी हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से प्रभावित इलाकों में तुरंत नावों की व्यवस्था करने, कम्युनिटी किचन शुरू करने, शुद्ध पेयजल, सूखा राशन, जलावन और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराने की मांग की है।

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