भागलपुर में रेशम कचरे के सही इस्तेमाल पर जागरूकता कार्यक्रम

भागलपुर के जगदीशपुर के मीरांचक में बुधवार को रेशम के कचरे के टिकाऊ इस्तेमाल और मूल्य संवर्धन पर एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम जिला उद्योग केंद्र और केंद्रीय रेशम बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में 'मेरा रेशम मेरा अभिमान (MRMA) 2.0' अभियान के तहत आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बुनकरों और रेशम उत्पादकों की आय बढ़ाना था।
- मीरांचक, जगदीशपुर, भागलपुर में हुआ आयोजन
- जिला उद्योग केंद्र और केंद्रीय रेशम बोर्ड की संयुक्त पहल
- बुनकरों और रेशम उत्पादकों की आय बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य
वैज्ञानिकों ने दी जानकारी
सत्र के दौरान वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने बताया कि रेशम के कचरे को फेंकने के बजाए अतिरिक्त आय कमाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB-CTRTI, रांची) के वैज्ञानिक डॉ. कर्मवीर जेना ने रेशम के कचरे के वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल इस्तेमाल पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस सामग्री को सेरीसिन, प्यूपा प्रोटीन, प्यूपा ऑयल और चिटिन-चिट्कोसन जैसे मूल्यवान उत्पादों में बदला जा सकता है, जिससे बुनकरों और कोकून उत्पादकों को कमाई के नए जरिए मिलेंगे।
नई तकनीकों को अपनाने की अपील
जिला उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक राकेश कुमार ने रेशम उत्पादकों और हितधारकों से इन नई वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतरीन इस्तेमाल से आय बढ़ेगी और टिकाऊ रेशम उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इस कार्यक्रम में उद्योग विस्तार अधिकारी श्याम प्रकाश, वैज्ञानिक-बी आकाश शर्मा और मो. नसीमउद्दीन अंसारी के साथ बड़ी संख्या में स्थानीय बुनकर और उत्पादक शामिल हुए।