भागलपुर हाउसिंग बोर्ड में बड़ा कब्जा विवाद, प्रशासन ने फिर से सील किया मकान

MyBhagalpur Team26 September 20262 min read12 viewsCity Local
भागलपुर हाउसिंग बोर्ड में बड़ा कब्जा विवाद, प्रशासन ने फिर से सील किया मकान

भागलपुर के बरारी हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में मकान संख्या 6 एलएच-01 को लेकर चल रहा पुराना विवाद अभी भी खत्म नहीं हुआ है। कई बार कोर्ट के आदेश और प्रशासनिक कार्रवाई के बाद भी यह विवाद बना हुआ है। 25 सितंबर 2026 को प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड की टीम ने इस संपत्ति को फिर से सील कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि अवैध कब्जाधारी बार-बार सील और ताले तोड़कर अंदर घुस जाता था।

  • हाउसिंग बोर्ड के मकान पर कब्जा को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई
  • मूल आवंटी योगेंद्र दास को अब तक नहीं मिला कब्जा
  • अवैध कब्जाधारी पर जुर्माना और एफआईआर की चेतावनी

दस्तावेजों में मूल आवंटी का नाम

दस्तावेजों से साफ होता है कि यह मकान मूल रूप से योगेंद्र दास को आवंटित किया गया था। 24 जून 2024 को पटना में बिहार राज्य आवास बोर्ड ने भागलपुर डिवीजन के कार्यपालक अभियंता को निर्देश दिया था कि वे मूल आवंटी को भौतिक कब्जा दिलाएं। इसके बावजूद दास को अभी तक वास्तविक कब्जा नहीं मिल पाया है।
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कोर्ट का पुराना आदेश

यह कानूनी विवाद 18 जुलाई 2022 को जारी बेदखली आदेश से जुड़ा है, जो बेदखली वाद संख्या 62/2021 के तहत आया था। अदालत ने नरेश नंदन चौधरी को अवैध कब्जाधारी घोषित किया और उन्हें 30 दिन के भीतर मकान खाली करने का आदेश दिया। आदेश में यह भी कहा गया था कि चौधरी मई 2018 से मकान खाली करने की तारीख तक 157,110 रुपये का मुआवजा देंगे और मकान खाली न रहने पर प्रतिदिन 50 रुपये का अतिरिक्त जुर्माना देना होगा।

पहले भी हो चुकी है सीलिंग की कार्रवाई

प्रशासन ने सबसे पहले 7 सितंबर 2022 को अनुमंडल पदाधिकारी और पुलिस की मौजूदगी में घर को खाली कराकर सील किया था। सील टूटने की खबरों के बाद, 4 नवंबर 2023 को एक मजिस्ट्रेट और पुलिस बल द्वारा संपत्ति को फिर से सील किया गया था।

अधिकारियों और परिवार का पक्ष

हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालक अभियंता राजीव रंजन कुमार ने बताया कि मूल रूप से योगेंद्र दास को आवंटित यह मकान unauthorized कब्जे और अवैध ट्रांसफर के कारण विवादों में है। जब प्रशासनिक टीम 25 सितंबर को पहुंची तो घर बंद था और कब्जाधारी अनुपस्थित था, इसलिए टीम ने मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में सरकारी सील लगा दी। कुमार ने चेतावनी दी कि सरकारी सील तोड़ने या संपत्ति में प्रवेश करने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी, और बोर्ड आगे के सरकारी निर्देशों का इंतजार कर रहा है। मूल आवंटी योगेंद्र दास के बेटे ललित कुमार ने बताया कि यह मकान 1992 में उनके पिता को आवंटित किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार ने अपने कानूनी अधिकार सुरक्षित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने में साल बिताए हैं, और जिला मजिस्ट्रेट के पिछले निर्देशों के बावजूद उन्हें स्थायी कब्जा नहीं मिला है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि उनके परिवार को संपत्ति ट्रांसफर करने के लिए ठोस कार्रवाई की जाए।

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