भागलपुर में काली पूजा 2026 की धूम: 81 स्थानों पर विराजीं माता काली, कामाख्या मंदिर जैसा दिखेगा नजारा
भागलपुर में काली पूजा 2026 की तैयारियां तेज। 81 स्थानों पर विराजीं माता काली, कामाख्या मंदिर जैसा पंडाल और तांत्रिक अनुष्ठान होंगे मुख्य आकर्षण।

बिहार के भागलपुर शहर में काली पूजा 2026 को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। इस साल शहर के करीब 81 प्रमुख स्थानों पर देवी काली की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जहां पूजा समितियों ने भव्य पंडालों और रोशनी की शानदार व्यवस्था की है। रविवार, 8 नहीं नवंबर 2026 की आधी रात को जैसे ही गर्भगृह के कपाट खुलेंगे, चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व का आगाज हो जाएगा।
काली पूजा महासमिति के अध्यक्ष धनंजय यादव और सदस्य रवि सिंह ने बताया कि शहर में दिवाली और काली पूजा का उत्सव चार दिनों तक मनाया जाता है। इस बार जोगसर/बुधनथ स्थित 200 साल पुराने बाम काली मंदिर में पारंपरिक तांत्रिक विधि से पूजा-अर्चना की जाएगी, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र होगी।
पंडालों की भव्यता और विशेष अनुष्ठान
शहर के अलग-अलग हिस्सों में इस बार कुछ बेहद खास आयोजन किए जा रहे हैं:
- मां बुधिया काली (इशाकचक): यहां का पंडाल असम के प्रसिद्ध कामाख्या देवी मंदिर की तर्ज पर बनाया गया है। समिति सदस्य मोनू मिश्रा के अनुसार, यहां तांत्रिक अनुष्ठानों के साथ-साथ कोलकाता के कलाकारों द्वारा भक्ति जागरण और झांकियां पेश की जाएंगी।
- सिद्धेश्वरी काली (बरारी बरगछ चौक): इस पंडाल की थीम भगवान शिव के महाकाल स्वरूप पर आधारित रखी गई है।
- मां बुधिया काली (पारबती): यहां स्थानीय कलाकारों और 'किलकारी' के बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- मशानी काली (उर्दू बाजार): बच्चों के लिए खेल और पेंटिंग प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है।
- हदबड़िया काली (मनरोजा): यहां सोमवार रात 12:30 बजे मूर्ति स्थापना होगी। मंदिर अध्यक्ष संजय सिंह ने बताया कि सोमवार को दोपहर 1 बजे खीर भोग, कन्या पूजन और ब्राह्मण भोज होगा, जबकि शाम 7 बजे खिचड़ी महाप्रसाद बांटा जाएगा। मंगलवार को भी हलवा और खिचड़ी भोग की परंपरा निभाई जाएगी।
इसके अलावा पार्वती, मनरोजा, एसकेपी, सराय रोड, कोयला घाट, कालीघाट, खिरनी घाट, बारी खानजुरपुर, भट्टा, जबरीपुर, कटरबारी, जरलाही, विकानपुर और लालुचक जैसे इलाकों में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। इस उत्सव का समापन एक विशाल विसर्जन जुलूस के साथ होगा, जिसमें भागलपुर के अलावा पड़ोसी जिलों और झारखंड से भी लाखों श्रद्धालुओं के जुटने की उम्मीद है।