भागलपुर की पुरानी कांथा कढ़ाई की शानदार वापसी

MyBhagalpur Team2 October 20261 min read0 viewsBusiness
भागलपुर की पुरानी कांथा कढ़ाई की शानदार वापसी

सिलक सिटी भागलपुर की 1980 के दशक की पारंपरिक कांथा कढ़ाई आधुनिक फैशन की दुनिया में फिर से लौट आई है।

पारंपरिक कला की वापसी

कभी यह कला चलन से बाहर मानी जाती थी, लेकिन अब यह पारंपरिक हाथ की कढ़ाई खादी सूती और टसर सिल्क साड़ियों पर नए डिजाइनों में जोड़ी जा रही है।

कारीगरों की मेहनत और दाम

स्थानीय बुनकर अब्दुल्ला ओवैसी ने बताया कि हर साड़ी को पूरा करने में चार से पांच दिन की मेहनत लगती है। हाथ से सिलाई की इस जटिल प्रक्रिया के कारण इन कपड़ों की कीमत 3,500 से 4,000 रुपये के बीच है।

रोजगार और बाजार में मांग

इस कला के पुनरुद्धार से स्थानीय महिलाओं को रोजगार के अवसर मिले हैं, और बुनकरों ने बिहार तथा बंगाल से बाहर के बाजारों से ऑर्डर बढ़ने की बात कही है। विशेष रूप से बंगाल से एडवांस बुकिंग में वृद्धि के साथ, बुनकर आशावादी हैं कि पारंपरिक कांथा कला समकालीन फैशन के रुझानों में अपनी प्रमुखता को सफलतापूर्वक फिर से स्थापित करेगी।

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