भागलपुर के लहेरी टोला में स्थित प्राचीन दुर्गा मंदिर अपनी सदियों पुरानी परंपराओं को आज भी निभा रहा है। इस मंदिर की स्थापना का कोई पक्का ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं है, लेकिन स्थानीय बुज़ुर्गों और लोगों का अनुमान है कि यह करीब 250 साल पुराना है। यह माना जाता है कि इसकी स्थापना चंपानगर के महाशय डेउरी के बाद हुई थी। शुरुआत में यह झोपड़ी जैसा था, और धीरे-धीरे इसमें सुधार हुआ जबकि पूजा के तौर-तरीके पुराने ही रहे। - मंदिर की स्थापना करीब 250 साल पुरानी मानी जाती है - चंपानगर की महाशय डेउरी के बाद हुई थी स्थापना - हर साल बंगाल से आते हैं सजावट के सामान - मूर्ति बनाने का काम पीढ़ियों से एक ही परिवार के पास है - साल 2001-02 में हुआ था बड़ा जीर्णोद्धार
मां दुर्गा की मूर्ति पुराने नियमों के मुताबिक ही बनाई जाती है, जो चंपानगर की महाशय डेउरी जैसी ही होती है।
इस एक ही ढांचे में नीचे मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी, मां सरस्वती, भगवान गणेश और भगवान कार्तिकेय होते हैं, जबकि ऊपर भगवान शिव की मूर्ति होती है। मूर्तियां बनाने का काम पीढ़ियों से एक ही परिवार के कुम्हार करते आ रहे हैं और सजावट का सामान हर साल बंगाल के एक खास कारीगर परिवार से मंगाया जाता है।
साल 2001-02 में मंदिर का बड़ा जीर्णोद्धार हुआ था, जिसके बाद परिसर में 11 देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की गईं।
मंदिर कमेटी के अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार गुप्ता ने बताया कि मूर्ति निर्माण और रंगाई समेत दुर्गा पूजा की तैयारियां अभी चल रही हैं। डॉ. गुप्ता ने बताया कि एक पुरानी परंपरा के अनुसार, लहेरी परिवार की किसी महिला को ही सबसे पहले मां दुर्गा को 'खोइंचा' चढ़ाना होता है, जिसके बाद बाकी महिलाएं ऐसा करती हैं। अष्टमी से दशमी तक मंदिर में भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है। इस आयोजन को श्यामानंद प्रसाद, अनुराग कुमार और मंदिर के पुजारी अरुण पाठक मिलकर संभाल रहे हैं।