भागलपुर नगर निगम की लापरवाही: त्योहारों के बीच अंधेरे में डूबीं शहर की सड़कें
भागलपुर नगर निगम LED स्ट्रीट लाइट लगाने की डेडलाइन से चूका, दिवाली के बाद भी हजारों पोल अंधेरे में, अब काली पूजा और छठ पर असर।

भागलपुर शहर को रोशनी से सराबोर करने का दावा करने वाला नगर निगम अपने ही वादों के जाल में फंस गया है। शहर की सड़कों पर 5,068 नए पोलों पर भागलपुर स्ट्रीट लाइट समस्या अब आम जनता के लिए सिरदर्द बन गई है। प्रशासन ने बड़े जोर-शोर से वादा किया था कि दुर्गा पूजा से पहले पूरा शहर जगमगा उठेगा, लेकिन वह समय तो बीत गया और अब दिवाली भी निकल गई, फिर भी काम अधूरा है।
हैरानी की बात यह है कि दिवाली तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन आंकड़ों पर नजर डालें तो 5,068 नियोजित लाइटों में से केवल 1,200 लाइटें ही लगाई जा सकी हैं। इसका मतलब है कि शहर के 3,800 से ज्यादा पोल अब भी अंधेरे में खड़े हैं। इस सुस्त रफ्तार का सीधा असर अब काली पूजा और सबसे महत्वपूर्ण महापर्व छठ पर पड़ने वाला है। श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को अंधेरी सड़कों और घाटों से गुजरना होगा, जिससे सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।
नगर निगम के दावों और हकीकत में बड़ा अंतर
नगर निगम के अधिकारियों ने अब यह स्वीकार कर लिया है कि अगले दो-तीन दिनों में बाकी बचे काम को पूरा करना तकनीकी रूप से नामुमकिन है। बार-बार डेडलाइन तय होने और फिर उन्हें मिस करने से स्थानीय पार्षदों और शहरवासियों में भारी नाराजगी है। निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी योजना को समय पर पूरा क्यों नहीं किया गया?
फिलहाल, नगर निगम का लाइटिंग विभाग वार्ड पार्षदों की सलाह पर संवेदनशील और मुख्य इलाकों को प्राथमिकता दे रहा है। हर वार्ड में 15 से 25 लाइटें बांटी जा रही हैं ताकि कम से कम प्रमुख चौराहों पर रोशनी रहे। लाइटिंग विभाग के प्रभारी जय प्रकाश यादव ने बताया कि अब तक 1,200 स्ट्रीट लाइटें लगाई जा चुकी हैं। उन्होंने आश्वासन दिया है कि बाकी बचा काम अब युद्ध स्तर पर किया जा रहा है और अगले एक महीने के भीतर पूरी परियोजना को पूरा कर लिया जाएगा।