प्रेम विवाह का खौफनाक अंत: मायके ने भी फेरा मुंह, मानवाधिकार आयोग आया आगे

MyBhagalpur Team20 September 20263 min read5 viewsSad/Bad
प्रेम विवाह का खौफनाक अंत: मायके ने भी फेरा मुंह, मानवाधिकार आयोग आया आगे

भागलपुर में प्रेम विवाह के बाद एक 20 वर्षीय विवाहिता अपने 8 महीने के मासूम बच्चे के साथ दर-दर भटकने को मजबूर है। ससुराल वालों की प्रताड़ना और मायके की बेरुखी से परेशान होकर पीड़िता ने न्याय की गुहार लगाई है।

  • 20 वर्षीय विवाहिता अपने 8 महीने के मासूम बच्चे के साथ भटक रही है
  • ससुराल वालों पर मारपीट और जान से मारने की कोशिश का गंभीर आरोप है
  • मायके वालों ने भी घर में रखने से साफ मना कर दिया है
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय ने मामले में तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करवाई है

प्रेम विवाह के बाद बदली स्थिति

भागलपुर, 20 सितंबर। प्रेम विवाह के बाद सुरक्षा और खुशियों के जो सपने एक युवती ने देखे थे, वे महज कुछ ही महीनों में बिखर गए। ससुराल वालों की बेरहमी और मायके की बेरुखी के बीच एक 20 वर्षीय विवाहिता अपने 8 महीने के मासूम बच्चे को लेकर दर-दर भटकने को मजबूर है। न्याय की गुहार लेकर पीड़ित महिला रविवार को राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय पहुंची, जहां मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. ईशान सिन्हा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करवाई। पीड़ित महिला ने राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय में लिखित आवेदन देकर अपनी आपबीती सुनाई। उसने बताया कि साल 2024 में उसने प्रेम विवाह किया था। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन शादी के महज 4-5 महीने बाद ही पति और ससुराल वालों का रवैया पूरी तरह बदल गया। वे उसे बुरी तरह प्रताड़ित करने लगे और अक्सर मारपीट करने लगे।
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ससुराल में प्रताड़ना और जानलेवा हमला

पीड़िता ने आवेदन में बब्बरगंज थाना क्षेत्र का निवासी होने की बात कहते हुए ससुराल वालों पर जान से मारने की कोशिश का गंभीर आरोप लगाया है। महिला ने रोते हुए बताया कि हद तो तब हो गई जब उसकी सास ने उसके 8 महीने के मासूम बच्चे का हाथ पकड़कर मरोड़ दिया। किसी तरह उसने अपने और बच्चे की जान बचाई और अपनी मां को सूचना देकर वहां से निकलने में कामयाब रही।

मायके से भी मिला दुत्कार

ससुराल से जान बचाकर भागी पीड़िता को जब मायके से सहारे की उम्मीद थी, तो वहां भी उसे दुत्कार ही मिली। पीड़िता के मुताबिक, उसके पिता ने उसे घर में रखने से साफ मना कर दिया और कहा कि प्रेम विवाह की हो, जाकर मर जाओ। जहां जाना है जाओ, मेरे घर से निकल जाओ। आज हालत यह है कि पीड़िता की मां को छोड़कर कोई उसके साथ खड़ा नहीं है। महिला ना तो मायके में रह पा रही है और ना ही ससुराल जा सकती है। उसके सामने रहने, खाने और बच्चे को पालने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

मानवाधिकार अध्यक्ष ने की कार्रवाई की मांग

राष्ट्रीय मानवाधिकार कार्यालय के अध्यक्ष डॉ. ईशान सिन्हा ने मां-बेटी के बयानों और 8 महीने के मासूम बच्चे की स्थिति को अत्यंत गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत बब्बरगंज थाना से संपर्क कर मामले की पूरी जानकारी दी और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की। बब्बरगंज थाना पुलिस ने भी मामले को गंभीरता लेते हुए पूर्ण आश्वासन दिया है कि दोषियों पर उचित कार्रवाई होगी। मानवाधिकार अध्यक्ष डॉ. सिन्हा ने पीड़िता को ढांढस बंधाते हुए कहा कि संगठन हर स्तर पर उसके साथ है और उसे न्यायालय के माध्यम से भी उचित न्याय जरूर दिलवाया जाएगा।

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