भागलपुर: 2008 में गंगा कटाव से उजड़े घर, 18 साल बाद भी जमीन की आस में महादलित परिवार
भागलपुर के खरिक ब्लॉक में 2008 में गंगा कटाव से बेघर हुए महादलित परिवार अब भी सरकारी आवास और जमीन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

बिहार के भागलपुर जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सरकारी सिस्टम की सुस्ती और बेबस इंसानों की मजबूरी को बयां करती है। खरिक ब्लॉक के काजीकौरैया और खैरपुर इलाकों के कई महादलित परिवार पिछले 18 सालों से एक पक्की छत और जमीन के टुकड़े के लिए तरस रहे हैं। साल 2008 में गंगा नदी के भीषण कटाव ने इन परिवारों से उनका सब कुछ छीन लिया था, लेकिन तब से अब तक प्रशासन की फाइलों में उनकी जिंदगी उलझी हुई है।
इन विस्थापित परिवारों का दर्द यह है कि वे सालों से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन नतीजा शून्य रहा। पीड़ितों का कहना है कि उनकी समस्या के समाधान के लिए अंचल अधिकारी (CO), प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO), भूमि सुधार उप समाहर्ता (LRDC) और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने मौके पर आकर जांच भी की। हर बार अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि समस्या का जल्द समाधान होगा, लेकिन वह 'जल्द' अब तक नहीं आया।
दफ्तरों के चक्कर और अधूरी कागजी कार्रवाई
बेघर परिवारों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाते हुए अपनी पीड़ा व्यक्त की है। उनका आरोप है कि उन्हें सहायता पाने के लिए एक विभाग से दूसरे विभाग के बीच फुटबॉल की तरह घुमाया जा रहा है। जमीन आवंटन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है, जिसके कारण ये परिवार आज भी असुरक्षित स्थितियों में रहने को मजबूर हैं।
जब इस मामले में अंचल अधिकारी प्रवीण कुमार से सवाल किया गया, तो उन्होंने इन दावों को खारिज कर दिया और कहा कि मामले को प्रशासनिक कार्यालय में भेजा जाएगा। फिलहाल, ये परिवार इस उम्मीद में हैं कि प्रशासन अपनी नींद छोड़ेगा और उन्हें वह जमीन और घर मिलेगा, जिसका वादा उनसे सालों पहले किया गया था।