भागलपुर के महाशय ड्योढ़ी मंदिर में दुर्गा पूजा की एक अनोखी धार्मिक परंपरा देखने को मिलती है, जो सामान्य नौ या दस दिनों के बजाय पूरे 18 दिनों तक चलती है। पूजा की शुरुआत जितिया के दिन बोधन घाट कलश की स्थापना के साथ होती है। जहां दूसरी जगहों पर बोधन घाट मनाया जाता है, वहीं महाशय ड्योढ़ी में बर्तन की स्थापना के तुरंत बाद औपचारिक अनुष्ठान शुरू हो जाते हैं।
इस मंदिर की परंपरा की एक मुख्य विशेषता भक्तों पर कौड़ी (समुद्री सीप) फेंकने की रस्म है, जो 18 दिनों की अवधि तक लगातार चलती है।
हजारों श्रद्धालु इसमें शामिल होते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि ये कौड़ियां मिलने से धन, समृद्धि और बीमारी से सुरक्षा मिलती है।मंदिर के इतिहास से जुड़े प्रतिनिधि हेमंत कुमार ने बताया कि महाशय ड्योढ़ी की दुर्गा पूजा बहुत प्रतिष्ठित है, जिसकी तुलना अक्सर कोलकाता की काली पूजा से की जाती है।
यह परंपरा मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में महाशय परिवार के पूर्वज श्री राम घोष द्वारा शुरू की गई थी। परिवार की 22वीं पीढ़ी वर्तमान में इस विरासत को आगे बढ़ा रही है। मूर्ति विसर्जन का समारोह विजयादशमी के दिन होता है।