भागलपुर में हैरान करने वाली सच्चाई: हजारों शादियां लेकिन रजिस्ट्रेशन सौ से भी कम

भागलपुर में शहरी और ग्रामीण इलाकों में हर साल हजारों शादियां होती हैं, लेकिन शादी का रजिस्ट्रेशन बहुत ही कम हो रहा है। निबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच सालों में रजिस्टर्ड शादियों की संख्या सौ तक भी नहीं पहुंच पाई है। जो लोग रजिस्ट्रेशन करवाते हैं, वे ज्यादातर मजबूरी में ऐसा करते हैं, जैसे लव मैरिज के मामले में या पति-पत्नी के साथ विदेश यात्रा के लिए पासपोर्ट बनवाने के वास्ते। ग्रामीण इलाकों से आवेदन ना के बराबर आते हैं, जिससे इस प्रक्रिया के प्रति लोगों में जानकारी की भारी कमी का पता चलता है। पटना हाईकोर्ट के वकील शिवशंकर चौबे ने जोर देकर कहा कि शादी का रजिस्ट्रेशन दोनों पक्षों के लिए एक जरूरी कानूनी सुरक्षा कवच है, खासकर घरेलू विवादों, संपत्ति के दावों, उत्तराधिकार के मामलों या अन्य कानूनी कार्रवाई के दौरान महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में। कोर्ट में शादी का प्रमाण पत्र ऐसा मुख्य और सबसे भरोसेमंद सरकारी दस्तावेज होता है जो इन समस्याओं को सुलझाने के लिए जरूरी होता है। चौबे ने इस लापरवाही के लिए जनता और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों की आलोचना की और बताया कि प्रशासन ने जागरूकता अभियान चलाने या रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने में असफलता दिखाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि शादी के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य और आसान बनाए बिना परिवार गंभीर कानूनी मुश्किलों का सामना करते रहेंगे।