भगतपुर में माता विषहरी को भावभीनी विदाई: 116 मूर्तियों का विसर्जन, उमड़ी भारी भीड़

भागलपुर में बुधवार को तीन दिनों तक चले माता विषहरी के धार्मिक उत्सव का समापन भावुक विसर्जन जुलूसों के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने सुबह अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मंदिरों में पूजा-अर्चना की, जिसके बाद शाम तक शहर की सड़कें विसर्जन जुलूसों से भर गईं और यह सिलसिला देर रात तक चला।
- कुल 116 मूर्तियों का विभिन्न नदी तटों और कृत्रिम तालाबों में विसर्जन किया गया।
- चंपा नगर पुल घाट पर दोपहर 2:00 बजे के बाद विसर्जन शुरू हुआ।
- मुसहरी घाट के कृत्रिम तालाब में विसर्जन देर रात तक चला।
- मुख्य केंद्रीय जुलूस रेलवे स्टेशन चौक से दोपहर 3:15 बजे निकला।
पारंपरिक रस्में और विसर्जन प्रक्रिया
मूर्तियों को ले जाने से पहले महिलाओं ने 'खोइचा' की रस्म निभाई, जो परिवार की समृद्धि के लिए की जाने वाली एक भावुक परंपरा है। चंपा नगर के मुख्य विषहरी मंदिर की प्राचीन मूर्ति के विसर्जन के बाद, पुजारी संतोष झा ने वैदिक रीति-रिवाजों से शांति अनुष्ठान किया। परबत्ती की मूर्ति दोपहर 3:15 बजे स्टेशन चौक पहुंची और उसके 20 मिनट बाद वरसालीगंज की मूर्ति पहुंची। केंद्रीय समिति के सदस्यों और भक्तों ने पारंपरिक आरती की और मूर्तियों को घाटों की ओर रवाना किया।
इस पूरे आयोजन का समन्वय केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष भोला कुमार मंडल, संरक्षक और पूर्व मेयर डॉ. वीणा यादव, प्रकाश चंद्र गुप्ता, कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कुमार और महासचिव शशि शंकर राय ने किया। जुलूस के दौरान युवाओं ने भाले और लाठियों के साथ पारंपरिक कौशल का प्रदर्शन किया।
विभिन्न घाटों पर विसर्जन की व्यवस्था
विसर्जन के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में व्यवस्था की गई थी। चंपा नगर और नाथनगर में दोपहर 1:00 बजे से 11 मूर्तियों का विसर्जन शुरू हुआ। रिफ्यूजी कॉलेज की 20 मूर्तियों को टैंक घाट के एक अस्थायी टैंक में विसर्जित किया गया। इसके अलावा, गौशाला, नया बाजार, आरके लेन, काजीवलीचक, ईशाकचक, ईश्वरनगर, गुदगंजन, साहेबगंज, अम्बाबाग, भिखनपुर, खानजपुर, तिलकामांझी, वरसालीगंज, गोलाघाट, उर्दू बाजार, आनंद हॉस्पिटल रोड और कुतुबगंज जैसे इलाकों की 32 मूर्तियों का विसर्जन मायागंज अस्पताल के पीछे बने कृत्रिम तालाब में किया गया। जुलूस खलीफाबाग, कोतवाली, नया बाजार और अदंपुर चौक से गुजरे, जहाँ खिलौनों और खाने-पीने के स्टॉल लगे थे।
महिला सशक्तिकरण और विशेष मांगें
डॉ. वीणा यादव ने इस उत्सव को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया और कहा कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। कार्यकारी अध्यक्ष प्रदीप कुमार ने सरकार से मांग की है कि विषहरी पूजा को 'राज्य मेला' का दर्जा दिया जाए, सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए और सती बिहुला की जन्मस्थली होने के कारण चंपा नगर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
इस आयोजन में सामाजिक सद्भाव भी देखने को मिला। उत्सव के आयोजन में योगदान के लिए महबूब आलम, मिंटू कलाकार, ताकी जावेद और नेजाहत अंसारी को सम्मानित किया गया।