भागलपुर में खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक बेअसर, नगर निगम ने अब तक नहीं दिया एक भी लाइसेंस

Pooja Kanjani3 March 20262 min read32 viewsCity Local
भागलपुर में खुले में मांस-मछली की बिक्री पर रोक बेअसर, नगर निगम ने अब तक नहीं दिया एक भी लाइसेंस

भागलपुर में खुले में मांस और मछली बेचने पर राज्य सरकार की पाबंदी पूरी तरह बेअसर साबित हो रही है। तिलकमांझी रोड, परबत्ती, भीखनपुर और बरारी जैसे मुख्य इलाकों में सड़क किनारे अभी भी धड़ल्ले से मीट की दुकानें सज रही हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग के कड़े आदेश के बावजूद शहर में नियमों की अनदेखी की जा रही है, जिससे आम लोगों को गंदगी और ट्रैफिक जाम की समस्या झेलनी पड़ रही है।

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नियमों के बाद भी शहर में क्या है मौजूदा हालात?

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भागलपुर नगर निगम (BMC) ने अभी तक किसी भी मीट या मछली वेंडर को नया ट्रेड लाइसेंस जारी नहीं किया है। निगम के लाइसेंस प्रभारी राकेश भारती ने पुष्टि की है कि फिलहाल सभी दुकानें तकनीकी रूप से अवैध हैं। बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 345 के तहत प्रशासन के पास इन दुकानों को सील करने का अधिकार है, लेकिन जमीन पर कोई बड़ी कार्रवाई नहीं दिख रही है। सड़क किनारे लगने वाली इन दुकानों से निकलने वाला कचरा खुले नालों में फेंका जा रहा है जिससे पूरे इलाके में बदबू फैली रहती है।

क्या हैं नए नियम और मीट-मछली के ताज़ा दाम?

नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार, अब मांस और मछली की बिक्री केवल बंद दुकानों के भीतर ही की जा सकती है। इसके लिए दुकानों में टिंटेड ग्लास या पर्दे लगाना अनिवार्य है ताकि बाहर से मांस दिखाई न दे। साथ ही स्कूल, कॉलेज और मंदिर-मस्जिद के पास दुकान लगाने पर पूरी तरह रोक है। शहर के बाजारों में कीमतों की स्थिति कुछ इस प्रकार है:

आइटम कीमत (प्रति किलो)
मटन (बकरा) ₹750 – ₹850
चिकन (मुर्गा) ₹180 – ₹220
रोहू मछली ₹200 – ₹280

बाजार के बदलते ट्रेंड और सेहत पर असर

हाल के दिनों में आंध्र प्रदेश और कोलकाता से आने वाली मछली की बिक्री में 40 से 50 फीसदी की गिरावट देखी गई है। इसका मुख्य कारण मछलियों में मिलने वाला फॉर्मेलिन रसायन है, जिसके डर से लोग अब स्थानीय ताजी मछली की मांग ज्यादा कर रहे हैं। डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने इस अभियान को सामाजिक सद्भाव और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बताया है। स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि खुले में मांस बेचने से डायरिया और अन्य संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है, इसलिए इन्हें सुरक्षित स्थानों पर बेचना जरूरी है।

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