रूपेश सोनी की मौत के बाद भागलपुर JLNMCH में छात्रों का हंगामा, OPD सेवाएं ठप
रूपेश सोनी की मौत के बाद भागलपुर JLNMCH के छात्रों ने शुरू की अनिश्चितकालीन हड़ताल, OPD सेवाएं ठप।

भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (JLNMCH) में उस समय भारी तनाव फैल गया, जब एमबीबीएस छात्र रूपेश सोनी की मौत के विरोध में मेडिकल छात्रों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। इस विरोध प्रदर्शन के कारण अस्पताल की ओपीडी (OPD) सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं, जिससे मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। छात्र अपनी मांगों के पूरा होने तक पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।
घटना 6 नवंबर 2026 की रात करीब 12:20 बजे की है। बताया जा रहा है कि रूपेश सोनी एक पार्टी से अपने हॉस्टल लौट रहे थे, तभी उनकी स्कूटी की एक कार से जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में रूपेश के सिर और कमर में गंभीर चोटें आईं। छात्रों का गंभीर आरोप है कि कार में सवार लोगों ने मानवता दिखाने के बजाय घोर लापरवाही बरती। आरोप है कि उन्होंने घायल रूपेश को सड़क किनारे फेंक दिया, उनके ऊपर एक जैकेट डाल दी और खुद अपनी गाड़ी का नुकसान देखने लगे। गंभीर हालत में रूपेश को बेहतर इलाज के लिए पटना ले जाया गया, लेकिन वहां उन्होंने दम तोड़ दिया।
CCTV फुटेज और फरार आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
इस घटना ने कॉलेज कैंपस में आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि इस मामले में कुछ संदिग्ध परिस्थितियां हैं, इसलिए घटनास्थल और आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जाएं ताकि सच सामने आ सके। छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि दुर्घटना के समय कार सवार लोग नशे में थे और चर्चा है कि ड्राइवर के ब्लड सैंपल में 'केटामिन' पाया गया है, हालांकि पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट से इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
मामले में अब तक रेडियो विभाग के डॉ. गौरव और सर्जरी विभाग के डॉ. चंद्र मोहन को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन छात्रों का दावा है कि कार में मौजूद तीन अन्य लोग—पीडियाट्रिक विभाग की आकांक्षा और आई डिपार्टमेंट की डॉ. शिवानी व डॉ. रुचि—अभी भी फरार हैं। छात्रों की मांग है कि इन सभी की तुरंत गिरफ्तारी हो।
इस बीच, स्थानीय विधायक रोहित पांडेय ने अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, कॉलेज अध्यक्ष एचपी दुबे की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि वे आरोपियों के पते उपलब्ध कराने में असमर्थ रहे, जिससे प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्र स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और सीसीटीवी फुटेज सामने नहीं आते, ओपीडी हड़ताल जारी रहेगी।