भागलपुर नगर निगम साल 2021-22 की सीएजी (CAG) ऑडिट रिपोर्ट को लेकर बड़े विवाद में फंस गया है, जिसमें भारी वित्तीय गड़बड़ियों का खुलासा हुआ है।
वार्ड 21 के पार्षद और सशक्त स्थायी समिति के सदस्य संजय कुमार सिन्हा ने मेयर डॉ. वसुंधरा लाल को पत्र लिखकर नौ प्रमुख ऑडिट आपत्तियों पर बिंदुवार कार्रवाई रिपोर्ट की मांग की है।
नगर विकास और आवास विभाग तथा बिहार विधानसभा की लोक लेखा समिति के सख्त रुख के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है, क्योंकि बार-बार निर्देश मिलने के बावजूद नगर प्रशासन ने अनुपालन रिपोर्ट नहीं दी है।
सीएजी रिपोर्ट में जनता के पैसों के गबन पर गंभीर चिंता जताई गई है, जिसमें ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए अलग खाता न रखना और 1.89 करोड़ रुपये के यूजर चार्ज वसूलने में गड़बड़ी शामिल है। अन्य आपत्तियों में कचरा निस्तारण योजनाओं पर सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) मद के तहत 22.62 लाख रुपये का बेकार खर्च और डस्टबिन खरीदने में 31 लाख रुपये की बर्बादी शामिल है। इसके अलावा, 1.27 करोड़ रुपये में खरीदे गए सामुदायिक डस्टबिन और कंटेनरों की जरूरत पर भी सवाल उठाया गया है, क्योंकि केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई में कचरे को अलग नहीं किया जा सका।
पहचानी गई अन्य वित्तीय गड़बड़ियों में जीईएम (GeM) पोर्टल के जरिए टेंडर प्रक्रिया में 69.66 लाख रुपये में कथित हेरफेर, जरूरत से ज्यादा ऑटो-टिपर खरीदने के कारण 10.72 लाख रुपये का बेवजह खर्च, और खरीदे गए उपकरणों को लावारिस या खराब स्थिति में छोड़ने से 8.25 लाख रुपये का नुकसान शामिल है।
पार्षद सिन्हा ने मेयर से अनुरोध किया है कि वे अनुपालन रिपोर्ट की स्थिति, संबंधित रिकॉर्ड की प्रतियां, जिम्मेदार अधिकारियों पर तय जिम्मेदारी का विवरण और किसी भी वसूली या दंडात्मक कार्रवाई का प्रमाण सार्वजनिक करें। उन्होंने लंबित मामलों के समाधान के लिए एक स्पष्ट समयसीमा की भी मांग की और जोर देकर कहा कि पारदर्शिता की कमी से संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच रहा है और करदाताओं के पैसे की बर्बादी हो रही है।